आपदा राहत के लिए पर्याप्त बजट जारी नहीं करने के नेता प्रतिपक्ष के आरोप पर पलटवार करते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि केंद्र से हिमाचल को वांछित आर्थिक मदद नहीं मिली है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि केंद्र से आपदा राहत लेने के लिए वे नई दिल्ली चलें। इस संबंध में प्रधानमंत्री से मिलने चलना है तो उसके लिए भी वह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वह नेता प्रतिपक्ष के क्षेत्र में शेल्टर होम बनाने को तैयार हैं। वह जमीन दिलाने में सहयोग करें। वन अधिकार अधिनियम को बदलने के लिए विपक्ष केंद्र के समक्ष आवाज उठाए, जिससे लोगों को जमीन दी जा सके।
मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही सोमवार को दोपहर दो बजे शुरू हुई। विपक्ष ने शोकोद्गार प्रस्ताव पर चर्चा के बाद प्रश्नकाल शुरू नहीं होने दिया। सदन की सारी कार्यवाही रोककर पिछले कुछ समय में प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान पर भाजपा विधायकों ने स्थगन प्रस्ताव दिया और इसे चर्चा के लिए मंजूर करने पर अड़े रहे। शुरू में तो सत्ता पक्ष ने यह कहकर विरोध किया कि इस संबंध में पहले से ही नियम 130 के तहत आधे घंटे के बाद चर्चा प्रस्तावित है, मगर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर इसे बड़ा मुद्दा बताते हुए नियम 67 के तहत सारा काम रोक कर चर्चा करवाने पर अड़े रहे। सत्ता पक्ष के हल्के-फुल्के विरोध के बाद मुख्यमंत्री इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार हो गए।
जयराम के वक्तव्य पर सदन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी जब थुनाग गए तो उनकी गाड़ी पर लगे तिरंगे पर जूते फेंके गए और मंत्री का अपमान किया गया। तिरंगे के लिए कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने अपनी जान दी है। सरकार की मामले में एफआईआर की कोई मंशा नहीं रही है, जिन्होंने तिरंगे का अपमान किया वे माफी मांगें कि गलती हुई है तो इस बारे में विचार किया जाएगा। सीएम ने कहा कि आपदा के समय यह नहीं देखा जा रहा था कि थुनाग पूर्व मुख्यमंत्री का क्षेत्र है। नेता प्रतिपक्ष का यह आरोप गलत है कि उनकी सरकार कुछ नहीं कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक घंटे सात मिनट के भाषण में पूर्व मुख्यमंत्री ने केवल सात मिनट अच्छी बात की है और बाकी समय राजनीति ही की है। आपदा के शुरुआती समय में ही ढाई सौ से तीन सौ करोड़ का आवंटन किया गया है। जयराम ठाकुर के क्षेत्र में कई लोगों ने पहली किस्त लेकर घर बनाने शुरू किए हैं। दूसरी किस्त तब जारी होगी, जब काम आगे बढ़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित उनके हलके में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के हेलिकॉप्टर सरकार के अनुरोध पर भेजे गए। सरकार ने कोई कमी नहीं रखी है।
मुख्यमंत्री ने चुटकी ली कि सांसद कंगना रणौत भी अगर केंद्रीय मंत्री बनतीं तो आपदा राहत आ जाती। नेता प्रतिपक्ष हेलिकाप्टर में भी भेजे गए और यह गलत आरोप लगा रहे हैं। भाजपा पांच गुटों में बंटी है। इन पर बहुत दबाव है।