राजधानी शिमला में इन दिनों बिजली के बिल अधिक आने से लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है। बिजली के नए मीटर लगाने के बाद से उपभोक्ताओं के बिलों में एकाएक इजाफा हुआ है।
बिजली बोर्ड का कहना है कि नए मीटर बिजली के हर प्वाइंट की मानीटरिंग करते हैं। घरों पर लगे इंडीकेटर तक से यूनिट्स में बढ़ोतरी हो रही है। जबकि पुराने मीटरों में ऐसा नहीं था। इसके अलावा बिना मोबाइल फोन लगाए अगर मोबाइल चार्जर प्वाइंट पर लगा है और स्विच ऑन है तो भी रीडिंग बढ़ती है।
ऐसे में हर कोई यह बिल कम करने को लेकर परेशान है। लेकिन, परेशानी से कुछ हासिल नहीं होगा। जरूरत है कुछ कदम उठाने की। अगर हम अपने घरों में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो बिजली की काफी बचत कर सकते हैं।
ऐसे कम करें बिल
कंप्यूटर्स पर सबसे ज्यादा बिजली उस वक्त वेस्ट होती है, जब वे यूज में नहीं होते। इसी तरह टेलिविजन, सीडी प्लेअर जैसे उपकरणों को स्विच ऑफ कर दें। मसलन अगर आप टीवी को रिमोट से बंद करते हैं और पावर ऑन रहती है तो भी बिजली कंज्यूम होती है।
घरों में अकसर देखने में आता है कि चाहे कमरे के एक कोने में बैठकर काम किया जा रहा हो, लेकिन सारी लाइटें जली होती हैं। ऐसे में टास्क लाइटिंग यानी जहां आदमी बैठा हो, वहीं की लाइट जलाने से बिजली की काफी बचत की जा सकती है।
घर की सभी लाइटों को रोज साफ करने की आदत डालें। इन पर धूल जमने से आप तक कम रोशनी पहुंच पाती है। इसके अलावा घर के सभी साधारण बल्बों को सीएफएल बदल दीजिए। गीजर और रॉड को भी समय से बंद कर दें।
बिजली के बढ़े बिलों ने दिया झटका
उधर, राजधानी में ठंड बढ़ने के साथ ही बिजली के बिलों में बढ़ोतरी हो गई है। बिजली की खपत बढ़ने के चलते उपभोक्ताओं के बिल महंगे स्लैब के दायरे में आ गए हैं। इस कारण मासिक बिल दोगुने हो गए हैं।
सितंबर और अक्तूबर महीने तक 300 से 400 रुपये का मासिक बिल चुकाने वाले उपभोक्ताओं को इस माह 900 से एक हजार रुपये के बिल आए हैं। भारी भरकम बिलों की शिकायत लेकर रोजाना कई उपभोक्ता बिजली बोर्ड के दफ्तरों में पहुंच रहे हैं।
यहां मीटर रीडिंग जांच होने के बाद सही साबित हो रहे बिलों को लेकर लोग मायूस लौट रहे हैं। दिसंबर महीने से मौसम में आए बदलाव के चलते राजधानी के अधिकांश घरों में हीटर, ब्लोर और गीजर अधिक देर तक चल रहे हैं।
इसलिए आ रहा ज्यादा बिल
तापमान में आई गिरावट के चलते पानी भी गर्म होने में अधिक समय लगा रहा है। ऐसे में जहां पहले 15 से 20 मिनट में गीजर या रॉड से पानी गर्म होता था। इसी काम को अब आधे घंटे से 45 मिनट तक लग रहे हैं। यूनिट्स 300 से अधिक होने पर बिल महंगे स्लैब के हिसाब से आ रहा है। इस कारण बिजली बिलों में एकाएक वृद्धि हो गई है।
क्या कहते हैं उपभोक्ता
कनलोग के रमन कुमार ने बताया कि अक्तूबर में उनका बिल 400 रुपये आया था। नवंबर महीने में बिल 950 रुपये आया है। लोअर खलीनी के प्रकाश शर्मा का कहना है कि अक्तूबर में बिल 756 रुपये था। नवंबर में बिल 1485 रुपये पहुंच गया। शिकायत करने पर बिजली बोर्ड के कर्मी ने घर पर आकर मीटर रीडिंग को दोबारा जांचा। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।