प्रारंभिक जांच में विजिलेंस ने संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, लाभार्थियों के बयान और अन्य साक्ष्यों का परीक्षण किया। जांच के दौरान सामने आया कि जिन लोगों के नाम पर सहायता राशि स्वीकृत हुई, उन्हें उसका वास्तविक लाभ नहीं मिला। शिकायतकर्ताओं समेत कुछ लाभार्थियों ने ब्यूरो को दिए बयानों में दावा किया कि खाते में आई राशि निकालकर पूर्व विधायक के निर्देश पर उन्हें दे दी गई। विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों और बैंक रिकॉर्ड के आधार पर प्रथम दृष्टया सरकारी धन के निर्धारित उद्देश्य के विपरीत उपयोग के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर मामला दर्ज किया गया है। विजिलेंस ने कहा कि जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम या अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की आवश्यकता है या नहीं। उधर, इस मामले में पूर्व विधायक से संपर्क नहीं हो पाया। सूत्रों के अनुसार पूर्व विधायक होशियार सिंह विदेश में हैं, जिस कारण मोबाइल नंबर पर भी उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, डीजीपी अशोक तिवारी ने इस मामले में किसी भी टिप्पणी से इन्कार किया।
पहले निर्दलीय लड़ा चुनाव, इस्तीफा देकर भाजपा में हुए शामिल
होशियार सिंह वर्तमान में भाजपा से जुड़े हैं। उन्होंने वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय विधायक रहते अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद भाजपा का टिकट लेकर देहरा से उपचुनाव लड़ा। हालांकि वह चुनाव हार गए थे। उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर चुनाव जीती थीं।
निधि के वितरण की व्यवस्था पर खड़े हुए सवाल
पूर्व विधायक पर मामला दर्ज होने के बाद विधायक ऐच्छिक विकास निधि की वितरण प्रक्रिया पर भी सवालिया प्रश्न खड़े हो गए हैं। ऐसे में विजिलेंस ब्यूरो की जांच का दायरा बढ़ सकता है। जांच एजेंसी इस तरह के वितरण के अन्य मामलों को भी देख सकती है।