सरकार ने बागवानी विभाग के अधिकारियों को निगरानी रखने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में विदेशों से आयात कर बिना क्वारंटीन किए सेब पौधे बेचने पर पूरी तरह से रोक है। सरकार ने विदेशों से आयात कर क्वारंटीन किए बिना सेब के पौधे बागवानों को बेचने के मामले में तीन नर्सरियों के सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश में बिना क्वारंटीन किए आयातित सेब पौधों से वर्षों पुराने बगीचों में वायरस का खतरा है। सरकार ने बागवानी विभाग के अधिकारियों को निगरानी रखने के आदेश दिए हैं। प्रदेश में विदेशों से आयात कर बिना क्वारंटीन किए सेब पौधे बेचने पर पूरी तरह से रोक है। सरकार ने विदेशों से आयात कर क्वारंटीन किए बिना सेब के पौधे बागवानों को बेचने के मामले में तीन नर्सरियों के सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं।
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ये नर्सरियां भी क्वारंटीन किए बिना सेब के पौधे गलत तरीके से बेच रही थीं। ऐसे मामले सामने आने के बाद सरकार ने बागवानी विभाग के अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं कि जो लोग बागवानी विभाग से सर्टिफिकेट लेकर आयातित सेब पौधे बागवानों को बेच रहे हैं, वे नियमों का सख्ती से पालन कर रहे हैं या नहीं। अगर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है तो ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
आयातित सेब पौधे एक साल रहते हैं क्वारंटीन
केंद्र सरकार के कड़े निर्देश हैं कि अगर कोई विदेशों से सेब या अन्य फलदार पौधे आयात करता है तो उनको भी एक साल तक क्वारंटीन करना जरूरी है। इस दौरान वैज्ञानिक नजर रखते हैं कि विदेश से पौधों के साथ कोई वायरस या कोई बीमारी तो ही आई है। ये पौधे सही पाए जाते हैं तो इन्हें बागवानों को बेचा जा सकता है। विदेशों से फलदार पौधे आयात करने के लिए बागवानी विभाग से सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है।
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क्या कहते हैं बागवानी निदेशक
प्रदेश बागवानी निदेशक जेपी शर्मा ने कहा कि विदेशों से सेब के पौधे आयात करने से पहले सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। इसके बाद इन पौधों को एक साल तक क्वारंटीन कर वैज्ञानिकों की निगरानी में रखना पड़ता है। इसके बाद ही बागवानों को ये पौधे बेचे जा सकते हैं। बागवानी विभाग के अधिकारियों को ऐसे लोगों पर निगरानी रखने को अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं।