बताते हैं कि महज दवाओं की आपूर्ति से अधिक अग्रिम भुगतान ही नहीं किया गया, अपितु जो दवाएं बागवानों के नाम खरीदी गई थीं, उनको बागवानों तक नहीं पहुंचाया गया। आज स्थिति ऐसी बनी हुई है कि ये दवाएं सरकारी गोदामों में धूल फांक रही हैं।
बागवान इनका समय पर इस्तेमाल तक नहीं कर पाए। इन दवाओं की मियाद गोदामों में पड़े खत्म हो चुकी है। सरकार ने दवाओं की खरीद के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई है। दवाओं की कीमत कितनी होगी? यह कमेटी तय करती है। कमेटी की सिफारिशों को भी पूरी तरह दरकिनार किया गया है।
क्या कहते हैं बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह
बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि इस गंभीर मामले की वह जांच करवाएंगे। अगर कोई अफसर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।