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गरीबों का पैसा मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराना भूले डीसी

Wed, 10 Jul 2019 12:36 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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हिमाचल के ज्यादातर जिलों के डीसी मुख्यमंत्री राहत कोष में नियमानुसार पैसा जमा करवाना ही भूल गए। यह लापरवाही ऑडिट के दौरान पकड़ में आई है। जिला राहत कोष में एकत्र कुल रकम का 50 फीसदी पैसा उपायुक्तों को मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करवाना होता है, लेकिन पिछले चार साल में जिलाधीश इस प्रावधान को धता बताते रहे। जिलों में हुई इस गलती से सीएम कार्यालय भी अनजान था। अब यह मामला सामने आया है तो इस लापरवाही के लिए जिम्मेवार रहे कई अधिकारी नप सकते हैं। राहत कोष का यह पैसा गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों में बांटा जाता है। 

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मुख्यमंत्री राहत कोष के एक अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2018 के बीच हुए अंकेक्षण में यह खुलासा हुआ है। स्थानीय लेखा विभाग के उपनिदेशक ने सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई करने की संस्तुति की है। उन्होंने मामला सरकार के उच्च अधिकारियों के ध्यान में भी लाया है। इस पत्र में लगभग ढाई दशक पुराने इस प्रावधान को भी स्पष्ट किया है।

हिमाचल प्रदेश के 15 सितंबर 1992 के आदेशों के अनुसार जिला राहत कोष में साल भर में एकत्रित धन राशि का आधा भाग मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करवाना जरूरी है, मगर विभिन्न जिलाधीशों की ओर से तय प्रावधान के अनुसार ऐसा नहीं किया गया। यही नहीं, जिलाधीश जिला राहत कोष में प्राप्त कुल धन राशि का ब्योरा भी मुख्यमंत्री राहत कोष को नहीं दे रहे हैं।

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सीएम राहत कोष में वित्त वर्ष 2014-15 में 16 करोड़ 15 लाख 47 हजार 504 रुपये प्राप्त किए गए और इनमें से 11 करोड़ 43 लाख 58 हजार 686 रुपये का जरूरतमंदों को भुगतान हुआ। वर्ष 2015-16 में हासिल 15 करोड़ 44 लाख 2 हजार 138 रुपये में से 12 करोड़ 1 लाख 48 हजार 137 रुपये बांटे गए। 2016-17 में 15 करोड़ 81 लाख 27 हजार 274 रुपये प्राप्त कर इसमें 12 करोड़ 85 लाख 4 हजार 335 रुपये का बंटवारा हुआ। वर्ष 2017-18 में 16 करोड़ 25 लाख 19 हजार 635 रुपये जारी हुए, जिसमें से 13 करोड़ 11 लाख 50 हजार 243 रुपये बांटे गए।   

मामला ध्यान में आया, हम देख रहे 
अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं प्रधान सचिव मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि यह मामला उनके ध्यान में आया है। वह इसे देख रहे हैं। 
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