निजी लैबों में टेस्ट के चुकाने पड़ते हैं 500 रुपये संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) में शाम ढलने के बाद एचआईवी टेस्ट की सुविधा नहीं मिल रही। टेस्ट करवाने के लिए मरीजों को निजी लैबों का रुख करना पड़ता है।
आईजीएमसी में रोजाना सैकड़ों की तादाद में मरीज उपचार के लिए आते हैं। उपचार के बाद चिकित्सक जब मरीज को ऑपरेशन करने की सलाह देते हैं तो मरीजों का एचआईवी टेस्ट करवाना जरूरी होता है। हालांकि रुटीन के मरीजों को सुबह 10:00 से शाम 4:00 बजे तक तो सुविधा मिल रही है, लेकिन इसके बाद यह सुविधा आपात स्थिति में आए मरीजों को नहीं मिल रही है। अस्पताल में जहां पर यह टेस्ट होते हैं वहां पर शाम को ताला लटक जाता है। ऐसे में जिन मरीजों को इस टेस्ट की जरूरत होती है, उन मरीजों को परिसर के बाहर इस टेस्ट के 300 से लेकर 500 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। इसके अलावा दूसरी ओर इमरजेंसी लैब में भी यह टेस्ट नहीं हो रहा है। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन को इसकी शिकायत मिली है। लेकिन इस पर अभी कोई सख्त एक्शन नहीं लिया है।
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मामला आया है ध्यान में
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राहुल राव ने बताया कि मामला ध्यान में आया है। जल्द इस समस्या का समाधान किया जाएगा जिससे कि मरीजों को परेशानी पेश न आए।
स्टाफ की समस्या है तो करें समाधान
आईजीएमसी में मरीजों के साथ आए तीमारदार नीना और सौरभ ने कहा कि उन्हें यहां पर तमाम सुविधाएं मिलनी चाहिए। स्टाफ की कमी है तो उसे पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में कई मरीजों के साथ महिला तीमारदार भी होती हैं, ऐसे में उन्हें परिसर से दूर निजी लैबों में टेस्ट करवाने के लिए जाने के दौरान काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। रात के समय सबसे अधिक परेशानी होती हैै।