डायबिटिक तथा कैंसर पेशेंट के लिए फंगल इंफेक्शन हानिकारक है। चिकित्सकों का कहना है कि जिन लोगों को शुगर, कैंसर, रीनल ट्रांसप्लांट और एचआईवी है उन मरीजों के शरीर में संक्रमण से लड़ने की क्षमता काफी कम होती है। आईजीएमसी स्किन विशेषज्ञ
डॉक्टर जीके वर्मा ने बताया कि बरसात के मौसम में उष्ण और नमी होने के कारण व्यक्ति के शरीर में फंगल इंफेक्शन ज्यादा होता है। उन्होंने बताया कि होटलों में काम करने वाले कामगार और हाउस वाइफ ऐसे संक्रमणों की चपेट में ज्यादा आते हैं।
ओपीडी में भी रोजाना दस से पंद्रह मामले पहुंचते है। इंफेक्शन होने पर बच्चों के बाल गिरना शुरू हो जाते हैं। दूसरे के संपर्क में आने से यह बीमारी बढ़ती है। लोगों को घरों में पालतू जानवरों को बिस्तर पर नहीं लाना चाहिए। इससे भी संक्रमण होता है। मिट्टी के संपर्क में आने से व्यक्ति की स्किन लाल हो जाती है।
नमी के कारण चिकनाहट होना तथा या स्किन का खराब हो जाना फंगल इंफेक्शन कहलाता है। फंगल मृत केराटीन से फैलता है और शरीर के नम स्थानों में फैलता है। पैर की एड़ी, नाखून, बाजू के नीचे के स्थान मुख्य भाग रहता है। स्किन फंगल इंफेक्शन के दौरान सफेद तरह की पपड़ी जम जाती है जिससे व्यक्ति के शरीर में खुजली होनी शुरू हो जाती है।