इस मौके पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मल्टी मीडिया लाइट और नवीनतम मनोरंजन प्रौद्योगिकी की मदद से सांस्कृतिक उद्यमों के लिए एक व्यावहारिक मॉडल तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि हिमालय क्षेत्र के मिथकों और किंवदंतियों को दर्शाने के भी प्रयास किए जाएंगे। यह पर्यटकों के लिए बड़ा मनोरंजक होगा, क्योंकि इससे ऐसा प्रतीत होगा कि पहाड़ जीवंत हो उठे हैं और दर्शकों से स्वयं बातें कर रहे हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि कंप्यूटर निर्मित दृश्य, डिजिटल विजुअल इफेक्ट्स, लाइव शूटिंग, पेंटिंग, लेजर लाइट और साउंड के माध्यम से बनाए गए एपिक शो एक भव्य एवं प्रभावशाली दृश्य प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि पर्यटकों को हाइड्रोलिक मूविंग प्लेटफॉर्म की सहायता से 3 डी के माध्यम से रोमांचकारी साहसिक खेलों के 7-डी जैसा प्रभाव प्रदान किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिमला के भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में भी ऐसी गतिविधियों के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मामला उठा सकती है।
इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी, सचिव भाषा और संस्कृृति डा. पूर्णिमा चौहान, निदेशक, पर्यटन सीपी वर्मा, प्रधान मुख्य वन अरण्यपाल अजय कुमार, प्रबंध निदेशक एचपीटीडीसी कुमुद सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह मौजूद रहे।