राज्य भर के सरकारी स्कूलों में हिंदी भाषा का शिक्षक बनने के लिए 19 अप्रैल को एलटी की परीक्षा में अंग्रेजी माध्यम के प्रश्न पूछ कर विभाग ने हजारों युवाओं को तगड़ा झटका दिया है।
हिंदी भाषा की परीक्षा में अंग्रेजी के प्रश्न डाल कर जहां संबधित विभागों की लापरवाही उजागर हुई है वहीं एक बार फिर से राज्य में भाषा अध्यापकों की नियुक्ति, नियम तथा भविष्य पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। कई युवा इसे सीधे तौर पर हिंदी भाषा का अपमान मान रहे हैं।
गत 19 अप्रैल 2015 को भाषा अध्यापक (एलटी) की परीक्षा में अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड हमीरपुर की ओर से जारी किए गए प्रश्न पत्र में तकरीबन सभी सीरीज में 10 प्रश्न ठेठ अंग्रेजी भाषा में पूछे गए थे।
इसके अलावा सामान्य ज्ञान के अन्य 40 प्रश्न हिंदी में ही पूछे गए थे। सवाल उठता है कि हिंदी शिक्षक बनने के लिए अंग्रेजी माध्यम से प्रश्न किस आधार पर पूछे गए? जबकि राज्य भर के सरकारी स्कूलों में हिंदी भाषा, व्याकरण, सुलेख, प्रार्थना पत्र एवं निबंध लेखन में छात्रों की प्रगति रिपोर्ट संतोष जनक नहीं है।
पहली बार परीक्षा में सामने आई ऐसी खामी
वर्ष 1990 से ही सरकारी स्कूलों में गणित, अंग्रेजी, इतिहास के साथ हिंदी विषय में भी छात्र फिसड्डी साबित हो रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में कई बच्चों को आज भी शुद्ध भाषा में प्रार्थना पत्र अथवा सुलेख लिखना नहीं आता।
छात्र हिंदी लेखन में दर्जनों अशुद्धियां करते हैं। जिससे निपटने के लिए विभाग तथा सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। राज्य में हिंदी भाषा शिक्षक से संबधित परीक्षाओं में आज तक कोई भी सामान्य ज्ञान का प्रश्न अंग्रेजी माध्यम से नहीं पूछा गया। बोर्ड की ओर से यह पहला तथा अनोखा मामला सामने आया है।
जिला में एलटी की परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी बलबीर शर्मा, मुंशी राम, सुरेश कुमार, अनिल, कला, संजीव, रमेश कुमार, लीला, प्रेमलता, विक्रम, नरेश कुमार, सुदेश, निर्मला, कपिल आदि ने प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह एवं बोर्ड अध्यक्ष से मांग करते हुए कहा है कि इस परीक्षा को या तो रद किया जाए या फिर अंग्रेजी माध्यम से पूछे गए 10 प्रश्नों की एवज में युवाओं को पूरे 10 अंक बोनस के रूप में दिए जाएं।
1990 से नहीं बनी भाषा अध्यापकों को नीति
राज्य भर में भाषा अध्यापक बनने के लिए विभाग तथा सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है। 90 के दशक से पूर्व भाषा अध्यापकों को डाइट के माध्यम से एक वर्ष का एलटी प्रशिक्षण कोर्स करवाया जाता था।
मगर यह अब पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। जबकि जेबीटी शिक्षक बनने के लिए हर वर्ष नए बैच प्रशिक्षित किए जाते हैं। यही नहीं पीटीए तथा एसएमसी के माध्यम से एलटी शिक्षक भर्ती में जो नियम तथा शर्तें रखी गई हैं वह भी तकनीकी तथा योग्यता के आधार पर सही नहीं हैं।
जिला प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक विजय प्रकाश ने कहा कि ‘‘भाषा अध्यापक चयन परीक्षा का अधिकार क्षेत्र अधीनस्थ सेवा बोर्ड हमीरपुर के अधीन है। चयन होने के बाद ही शिक्षक प्रारंभिक शिक्षा विभाग के अधीन अपनी सेवाएं देते हैं