प्रदेश सरकार ने सूबे में छह शहर बसाने का फैसला लिया है, लेकिन इनके लिए जमीन नहीं मिल रही है। ये सेटेलाइट टाउन पीपीपी मोड पर बनाए जाएंगे। एक सेटेलाइट टाउन बनाने के लिए हिमुडा को कम से कम 500 बीघा जमीन चाहिए।
हिमुडा को जो जमीन मिल रही है, वह 300 बीघा और इससे कम है। कुल छह सेटेलाइट टाउन बनाने के लिए हिमुडा को 4000 बीघा जमीन की दरकार है। किस जिले में सेटेलाइट टाउन बनाए जाएंगे, सरकार ने इसके स्थान चयनित कर लिए हैं।
शिमला, धर्मशाला के चैतड़ू, हमीरपुर, मंडी, सोलन और ऊना को नए सिरे से सेटेलाइट टाउन में शामिल किया है। हिमुडा की सेलेक्शन कमेटी ने इन जिलों का दौरा किया, लेकिन उपयुक्त जमीन नहीं मिली। इन शहरों के निर्माण के साथ कालोनियों में सड़क, पानी, बिजली और सीवरेज सुविधा भी मुहैया करवाई जानी है।
एक ही जगह पर चाहिए जमीन
हिमुडा को कालोनी बनाने के लिए एक ही स्थान पर 500 बीघा भूमि चाहिए। हालांकि, हिमुडा को जमीन मिल रही है, लेकिन एक स्थान पर इतनी जमीन नहीं है। कई जिलों में हिमुडा ने तीन से साढ़े तीन सौ बीघा जमीन फाइनल की है। इसमें प्लॉट और फ्लैट का निर्माण तो किया जा सकता है, लेकिन सेटेलाइट टाउन नहीं बनाया जा सकता।
हतर ढंग से बसाए जाने हैं शहर
शहरी आवास मंत्री सुधीर शर्मा ने कहा कि एक-दो जगह जमीन मिली है। अभी जमीन को फाइनल नहीं किया है। हिमुडा अच्छी जमीन की तलाश में है। सरकार ने 6 सेटेलाइट टाउन बनाने का फैसला लिया है। अधिकारिक तौर पर इसकी प्रक्रिया चली हुई है।