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चोल्टू नृत्य को आज भी जीवित रखे हैं देव कारिंदे

Mon, 22 Jul 2019 12:46 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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चोल्टू नृत्य - फोटो : फाइल फोटो
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हिमाचल में देवी-देवताओं के रीति-रिवाजों के साथ लोक कला गहरी जुड़ी है। ऊपरी शिमला में देवी-देवताओं से जुड़ा है चोल्टू नृत्य। इसमें रथनुमा पालकी में बैठाई गई देव प्रतिमाएं नचाई जाती हैं तो इसकी गोलाई में चोल्टू नृत्य होता है। एक खास तरह की पोशाक को चोल्टू कहते हैं। इसके साथ पगड़ी पहनी जाती है। इसे पहनकर देव-कारिंदे ढोल, नगाडों, करनालों और शहनाई के सुरों पर नाचते हैं। 

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यह देव-नृत्य ऊपरी शिमला की कई देवठियों यानी देव मंदिरों के तहत आने वाले क्षेत्रों में होता है। इस नृत्य के बीच लोगों का भी खूब मनोरंजन होता है। नृत्य के बीच ही देव-गूरों को खेल आती है। वे भी इस नाच के बंद होने के बाद लोगों को देवता की ओर से आशीर्वाद देते हैं। इन दिनों ठियोग के डोम देवता गुठाण अपनी जातर यात्रा कर रहे हैं। इसी यात्रा के बीच इनका चोल्टू नृत्य होता है।

इस सामूहिक नृत्य की अगुवाई करने वाले देवता कमेटी के कारिंदे और ठियोग के पंचायत समिति अध्यक्ष मदन लाल वर्मा ने बताया कि यह देव अथवा लोक नृत्य सदियों से हो रहा है। सबसे आगे नाचने वाला व्यक्ति देवता के मंदिर का चांदी का ताला लेकर नाचता है। यह नृत्य आस्था, परंपरा और मनोरंजन का मिश्रित रूप है।
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इसे खास तरह की लय के साथ नाचा जाता है। लोकगीतों पर शहनाई की धुन बजाई जाती है। इसी पर नृत्य होता है। इस बार इस नृत्य को शिमला के रिज मैदान पर करवाने के लिए भी सरकार से अनुमति मांगी जाएगी। परंपरा से यह हर बीस साल बाद रानी झांसी पार्क में भी नाचा जाता है। इस बार इसे 400 के करीब स्थानों पर किया जा रहा है।

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