यूक्रेन के खारकीव में भारतीय विद्यार्थियों तक केंद्र सरकार और भारतीय दूतावास से न मदद और न कोई एडवाइजरी मिल रही है। इससे वहां फंसे सैकड़ों विद्यार्थी परेशान हैं। बुधवार को मेडिकल यूनिवर्सिटी के बंकर से निकलकर भारी गोलीबारी और बमबारी के बीच करीब 15 किलोमीटर खारकीव के निकट रेलवे स्टेशन पर पहुंचे भारतीय विद्यार्थियों को यूक्रेन की सेना ने ट्रेन में नहीं बैठने दिया। केवल स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी गई। इसके बाद इन्हें कंसलटेंसी सर्विस 12 किलोमीटर आगे पश्चिनो क्षेत्र स्थित एक स्कूल के शेल्टर होम में ले गई। यहां पहुंचने के बाद करीब 450 विद्यार्थियों को 24 घंटे के बाद पानी की एक बोतल और खाने के लिए दो छात्रों को 48 घंटे बाद केवल एक संतरा दिया गया। पश्चिनो में स्कूल के शेल्टर होम में पहुंचे सुंदरनगर के अंकुर चंदेल पुत्र नरेश चंदेल और उसके साथ रह रहे लखनऊ के सागर वर्मा पुत्र सुरेश कुमार ने बताया पश्चिनो खारकीव से 12 किलोमीटर दूर है। खारकीव में रूस की सेना ने एयर स्ट्राइक कर यूनिवर्सिटी को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है। जहां वह रह रहे हैं, वहां भी गोलीबारी और बमबारी हो रही है। रेलवे स्टेशन पर भारतीयों के लिए लौटने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि उन्हें जल्द यहां से निकाला जाए। अंकुर चंदेल के पिता नरेश चंदेल ने केंद्र और प्रदेश सरकार से गुहार लगाई है कि जल्द बच्चों को वहां से निकालने की व्यवस्था की जाए।
वहीं, यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध के बीच हिम्मत जुटाकर शिमला की अनुष्का कुठियाला, अदिति शर्मा, करसोग के शिवांश सहित अन्य प्रदेशों के दो छात्र खारकीव से बुधवार को भारतीय समय के अनुसार करीब साढ़े छह बजे पोलैंड पहुंच गए हैं। लवीव पहुंचने पर टैक्सी का इंतजाम कर करीब 24 घंटे का सफर किया और पोलैंड पहुंचे। इन्हें होटल में ठहराने की व्यवस्था कर दी गई है। अनुष्का के पिता राजीव कुठियाला, अदिति के पिता नरेश और शिवांश के पिता राकेश ने बताया कि बच्चों से व्हाट्सएप पर और वॉयस कॉल से संपर्क हो पा रहा है। छात्रों की अभिभावकों को बताया कि यहां खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था ठीक है। उनके साथ ट्रेन में आए करीब डेढ़ सौ विद्यार्थी भी यहीं रुके है। उम्मीद है कि दो दिन में सुरक्षित लौट जाएंगे। उन्होंने बताया कि सोनू सूद ने भी भारतीय बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए मिशन यूक्रेन अभियान चलाया है। उसमें भी बच्चों के नाम दर्ज करवाए थे। अब उन्हें नहीं मालूम में पोलैंड में भारतीय दूतावास या फिर सोनू सूद की यह संस्था बच्चों का ख्याल रख रही है।