हिमाचल के सांसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कदमताल नहीं कर पा रहे हैं। मोदी ने वाराणसी में आदर्श ग्राम के नाम का चयन कर लिया, लेकिन प्रदेश के चार सांसद अभी तक गांवों के नाम तक नहीं फाइनल नहीं कर पाए है।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नितिन गड़करी ने हिमाचल सहित देश भर के सांसदों को नोटिस थमाया है। इसको लेकर राज्य के भाजपा सांसदों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा हो रहा है।
आखिर क्या कारण है कि उनकी ओर से तेजी नहीं दिखाई जा रही है। सूबे के जिन सांसदों ने अभी तक आदर्श ग्राम के नाम को चयनित नहीं किया है। उनमें शिमला के सांसद वीरेंद्र कश्यप, मंडी के सांसद राम स्वरूप शर्मा, राज्यसभा सांसद जेपी नड्डा और विमला कश्यप शामिल है।
देहला गांव की तकदीर बदलेंगे अनुराग
गांव को गोद लेने में हिमाचल प्रदेश के सांसद अनुराग ठाकुर अव्वल रहे। योजना के लांचिग के दिन ही हमीरपुर के सांसद ने ऊना जिले के देहला गांव को आदर्श ग्राम बनाने के लिए नाम का चयन कर लिया। उनकी ओर से दावा किया गया है कि अगले पांच साल में तीन नहीं बल्कि पांच गांवों को आदर्श ग्राम बनाया जाएगा।
नोटिस के बाद शांता ने किया चयन
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री से नोटिस मिलने के बाद कांगड़ा के सांसद शांता कुमार ने आदर्श ग्राम के नाम का चयन कर लिया है। शांता कुमार ने बताया कि वीरवार को उन्होंने नाम चयन किया है। कांगड़ा संसदीय क्षेत्र के चंबा जिले के भटियार विधानसभा क्षेत्र के परछोड़ गांव को उनके द्वारा विकसित किया जाएगा।
किसकी क्या सफाई?
'मंडी संसदीय क्षेत्र में आदर्श ग्राम के नाम के चयन की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। अगले सप्ताह गांव का नाम हर हाल में फाइनल कर दिया जाएगा।' -- राम स्वरूप शर्मा, सांसद मंडी
'शिमला संसदीय क्षेत्र के सोलन जिले में आदर्श गांव बनाने के लिए तय किया है। जिले के सभी ब्लाकों से दो-दो गांवों के नाम मंगाए गए है। अगले सप्ताह लाटरी के माध्यम से एक गांव के नाम को चयनित किया जाएगा।' -- वीरेंद्र कश्यप, सांसद शिमला
'मै अभी बीमारी हूं, जिसके कारण गांव के नाम का चयन नहीं कर पा रही हूं। इतना तय किया है कि शिमला जिले में एक आदर्श ग्राम बनाऊंगी। शिमला आने के बाद इसे फाइनल करूंगी।' -- विमला कश्यप, सांसद राज्य सभा