रमेश ठाकुर को संगीत का शौक बचपन से ही था, लेकिन उस दौर में सुविधाएं न होने से रमेश दूरदर्शन पर आने वाले चित्रहार का बेसब्री से इंतजार करते थे। सप्ताह बाद आने वाले चित्रहार के गानों को लिखते थे और फिर उन्हें गाने का अभ्यास करते थे। कई बार तो गाना आधा ही लिखा जाता था।
एक सप्ताह तक चित्रहार का इंतजार करना पड़ता था। लोक गायक ने कहा कि गाने की सुविधाओं का अभाव था, लेकिन गायन का शौक था। वह अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे। उन्होंने कहा कि लोक संगीत पर उनका पूरा फोकस है। मोहम्मद रफी और लोक गायक धमेंद्र शर्मा को वह अपना आदर्श मानते हैं।