जब फिर भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो फर्म ने फिर से समय बढ़ाने का आवेदन किया। डीसी सिरमौर ने आवेदन रद्द करने के साथ-साथ 31 जुलाई 2018 को जमीन भी सरकार के अधीन लेने के आदेश पारित कर दिए।
फर्म ने हाईकोर्ट में डीसी सिरमौर के आदेशों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा कि यदि फर्म प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए समय-सीमा बढ़वाने में नाकाम रही, फिर भी उसकी जमीन सरकार अपने अधीन नहीं कर सकती, क्योंकि फर्म के पार्टनर हिमाचली होने के नाते हिमाचल में जमीन खरीदने का पूरा हक रखते हैं।
इसलिए कम से कम फर्म की जमीन उनके नाम की जा सकती है। कोर्ट ने डीसी सिरमौर के फैसले को निरस्त करते हुए इसे हाईकोर्ट के निर्णय के दृष्टिगत फिर से फैसला पारित करने के आदेश दिए।