फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचली कृषकों की फर्म को धारा-118 की मंजूरी की जरूरत नहीं

Sun, 03 Mar 2019 11:26 AM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

हिमाचली कृषकों की फर्म को प्रदेश में जमीन खरीदने के लिए भू-सुधार अधिनियम की धारा-118 के तहत सरकार से इजाजत लेने की कोई जरूरत नहीं है। हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने दो हिमाचली कृषकों की फर्म की ओर से खरीदी गई जमीन को सरकार के अपने अधीन करने के फैसले को निरस्त करते हुए यह व्यवस्था दी। 

विज्ञापन


दो हिमाचली कृषकों की ओर से बनाई फर्म मैसर्ज के-लैंड जुब्बल ने 21 जून 2014 को हाउसिंग कॉलोनी बनाने के लिए धारा 118 के तहत अनुमति ली और उसके बाद 18 जून 2015 को प्रोजेक्ट के लिए कृषि योग्य जमीन खरीदी। दो वर्ष के भीतर फर्म प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पाई। फर्म के आवेदन पर डीसी सिरमौर ने एक वर्ष का अतिरिक्त समय प्रदान कर दिया। 

विज्ञापन

हिमाचल में जमीन खरीदने का पूरा हक

 जब फिर भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ तो फर्म ने फिर से समय बढ़ाने का आवेदन किया। डीसी सिरमौर ने आवेदन रद्द करने के साथ-साथ 31 जुलाई 2018 को जमीन भी सरकार के अधीन लेने के आदेश पारित कर दिए।

फर्म ने हाईकोर्ट में डीसी सिरमौर के आदेशों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने फैसले में कहा कि यदि फर्म प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए समय-सीमा बढ़वाने में नाकाम रही, फिर भी उसकी जमीन सरकार अपने अधीन नहीं कर सकती, क्योंकि फर्म के पार्टनर हिमाचली होने के नाते हिमाचल में जमीन खरीदने का पूरा हक रखते हैं।

इसलिए कम से कम फर्म की जमीन उनके नाम की जा सकती है। कोर्ट ने डीसी सिरमौर के फैसले को निरस्त करते हुए इसे हाईकोर्ट के निर्णय के दृष्टिगत फिर से फैसला पारित करने के आदेश दिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें