राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में परामर्श और शीघ्र हस्तक्षेप के लिए 108 नए दिशा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां आशा कार्यकर्ताओं, चिकित्सक और मनोचिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरुषों के लिए चार नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, जबकि कुल्लू जिले में रेड क्रॉस सोसायटी की ओर से महिलाओं के लिए एक अलग केंद्र संचालित किया जा रहा है। जन जागरूकता प्रयासों के तहत राष्ट्रीय नशा निवारण अभियान के तहत 5.76 लाख से अधिक लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया है। इस अभियान में 5,660 गांवों और 4,332 शैक्षणिक संस्थानों को शामिल किया गया है, जिसमें किशोरों, युवाओं, महिलाओं और आम जनता पर विशेष ध्यान दिया गया है। नशीले पदार्थों के अवैध निर्माण पर अंकुश लगाने के लिए सरकार उपमंडलाधिकारी के नेतृत्व में विशेष निगरानी समिति का भी गठन कर रही है। इसमें आबकारी, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे, जो संहिता संबंधी औपचारिकताओं की निगरानी करेंगे।
नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल लोगों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास
सरकार ने हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (रोकथाम एवं नियंत्रण) विधेयक 2025 पारित किया है। इसमें नशीली दवाओं की तस्करी में शामिल लोगों के लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास, 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और अवैध रूप से अर्जित संपत्ति को जब्त करने सहित कठोर दंड का प्रावधान है। साथ ही हिमाचल प्रदेश मादक पदार्थ एवं नियंत्रित पदार्थ (रोकथाम, नशामुक्ति एवं पुनर्वास) विधेयक 2025 नशामुक्ति, पुनवोस, निवारक शिक्षा और आजीविका संबंधी पहलों को समर्थन देने के लिए एक राज्य कोष के व्यापार में लिप्त लोगों के लिए कठोर दंड का भी प्रावधान करता है। की स्थापना करता है। साथ ही अवैध नशीली दवाओं के व्यापार में लिप्त लोगों के लिए कठोर दंड का भी प्रावधान करता है।