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स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से बचाएगा ये मशरूम

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त्वचा को जवान रखने और स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से बचाने वाली रयिशी मशरूम को अब हिमाचल में उगाया जा सकेगा। मशरूम सिटी सोलन में खुंब अनुसंधान केंद्र (डीएमआर) और नौणी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस मशरूम को तैयार कर लिया है।
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यह मशरूम खाने योग्य नहीं है, लेकिन स्वाइन फ्लू से लड़ने वाली दवा से लेकर एंटी ऐजिंग दवा, महंगे कास्मेटिक्स और न्यूट्रिशन सप्लीमेंटस में इसका इस्तेमाल हो रहा है। वर्तमान में देश और विदेश की फार्मा और कास्मेटिक्स इंडस्ट्री में इसकी भारी मांग है। मुख्य उत्पादक देश मलेशिया और चीन से भारत में भी यह मशरूम भारी मात्रा में आयात की जाती है।
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क्या है रयिशी मशरूम

औषधीय गुणों से भरपूर इस मशरूम का सालाना ग्लोबल कारोबार दो बिलियन डॉलर के करीब है। लिहाजा खुंब अनुसंधान केंद्र और नौणी विवि की सफलता के बाद प्रदेश के किसानों को व्यावसायिक उत्पादन के लिए प्रयास शुरू होने की बात कही जा रही है जिसमें केंद्र और राज्य सरकार की मदद भी ली जाएगी। यह खुलासा वीरवार को मशरूम शहर सोलन शहर में खुंब अनुसंधान केंद्र की 18वीं वर्षगांठ के दौरान वैज्ञानिकों ने किया है।

वैज्ञानिको के मुताबिक रयिशी मशरूम एंटीऑक्सिडेंट का एक बड़ा स्रोत है। यह पर्यावरण प्रदूषण और हानिकारक एजेंटों से त्वचा की रक्षा कर सकते हैं। इस दुर्लभ मशरूम के सक्रिय तत्व झुर्रियां, असमान त्वचा टोन, और त्वचा के छिद्रों को ठीक करने की क्षमता रखते हैं।

इसमें मौजूद पालिसाइक्राइडस बीटा ग्लूकोन जनरेट करते हैं। यह स्वाभाविक रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाते हैं। खासकर स्वाइन फ्लू के रोगियों के लिए यह रामबान माना जाता है। जबकि इसके कुछ गुण कैंसर, अलसर और एचआईवी के रोगियों के लिए कारगर साबित हो सकते हैं।
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नौणी में ऐसी किस्म की ईजाद

नौणी में वैज्ञानिकों की पहली कोशिश बेकार साबित हुई। लेकिन प्लांट पैथोलजी विभाग ने दूसरी कोशिश लकड़ी के आरे से निकलने वाले बुरादे से कंपोस्ट (खाद) तैयार करके की। यह कोशिश कामयाब रही। इसमें चौड़ी पत्ते वाले पेड़ों के बुरादे को इस्तेमाल किया गया। इसे पाली सेच्युरेटिड करके बीज डाला गया। कंट्रोल तापमान में पूरी देखरेख के साथ इसकी सफल पैदावार की गई।

यहां वैज्ञानिकों ने तलाशी संभावना
पिछले कुछ वर्षों से इस मशरूम का तैयार करने वाले नौणी विवि कि प्लांट पैथोलोजी विभाग के डॉ. धर्मेश गुप्ता ने बताया कि इसे 32 से 35 डिग्री के तापमान में तैयार किया जा सकता है। नौणी विवि में इसी तापमान को बनाकर यह मशरूम तैयार की है। इसे कांगड़ा, चंबा, हमीरपुर, ऊना, बिलासपुर, मंडी और सिरमौर के गर्म क्षेत्रों में खुली आवोहवा में तैयार किया जा सकता है।
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