तापमान बढ़ते ही अब लाहौल में हिमस्खलन का सिलसिला शुरू हो गया है। रविवार सुबह 10:38 बजे लाहौल घाटी में शूलिंग गांव के सामने वामतट पर हिमखंड गिरकर चंद्रा नदी में जा गिरा। इससे नदी का बहाव कुछ समय के लिए थम गया। लोग डर के चलते घरों में दुबक गए। हालांकि उपायुक्त लाहौल-स्पीति सुमित खिमटा ने कहा कि इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है।
उधर, रविवार को प्रदेश में मौसम साफ रहा, लेकिन सोमवार और मंगलवार के लिए मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने भारी बारिश-बर्फबारी का येलो अलर्ट जारी किया है। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि तो कहीं-कहीं बिजली भी गिर सकती है। रविवार को केलांग में न्यूनतम तापमान सबसे कम 0.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि सबसे अधिक न्यूनतम तापमान पांवटा साहिब में 26 डिग्री सेल्सियस रहा। लाहौल घाटी में मकरवे और शिकरवे के बीच हिमखंड गिरने से बहुत बड़ा बवंडर पहाड़ी से नीचे आया।
नदी के दूसरी ओर तक एक किलोमीटर तक हवा में यह बवंडर लहराता रहा। इस बीच, कुछ समय के लिए चंद्रा नदी का प्रवाह भी रुक गया था, लेकिन बाद में नदी का प्रवाह सामान्य हो गया। शूलिंग गांव के अनिल कुमार ने हिमस्खलन का वीडियो मोबाइल के कैमरे में कैद किया। उधर, रामपुर में भूस्खलन से एक मकान ध्वस्त हो गया। मकान में रह रहे कामगार जान बचाकर भागे।
बारिश-अंधड़ से गेहूं, जौ की फसलों को नुकसान
प्रदेश में बारिश और अंधड़ से गेहूं और जौ की फसलों को 20 फीसदी नुकसान हुआ है। सोलन, कांगड़ा और ऊना जिले में फसलों केे नुकसान की रिपोर्ट विभाग के पास पहुंची है। कृषि विभाग के अनुसार मटर की फसल को भी नुकसान हुआ है। खराब मौसम के चलते सब्जियों की रोपाई में विलंब हुआ है। राज्य के कृषि निदेशक डॉ. राजेश कौशिक कहते हैं कि सोलन के नालागढ़, ऊना और कांगड़ा के कई क्षेत्रों में गेहूं और जौ की फसल खराब हुई है। टमाटर, शिमला मिर्च, बैंगन और मिर्च के पौधों की रोपाई दस दिन देरी से होगी।