उधर, मंडी जिले में भी हालात समान्य नहीं हुए हैं। टारना में 22 से अधिक घर ढहने के बाद 40 और घरों को खतरा हो गया है। प्रशासन ने घर खाली करवा लिए हैं। सराज घाटी में खतरे में आए मकानों से लोगों को रेस्क्यू करने के लिए अभियान चलाया है। सेना के हेलिकाप्टर से शुक्रवार को भी दुर्गम इलाकों के लिए राहत सामग्री भेजी गई। पंडोह डैम के आसपास फंसे करीब 200 वाहनों और लोगों को निकालने के लिए प्रयास जारी हैं। मलबे में दबे ताई और भतीजी के शव अभी तक नहीं मिल पाए हैं। शुक्रवार को भले ही सूबे के अधिकतर इलाकों में धूप खिली लेकिन 450 सड़कों पर अभी आवाजाही ठप है।
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार को दिनभर धूप खिली रही। हालांकि शनिवार को कुछ क्षेत्रों में बारिश का येलो अलर्ट है, लेकिन आगामी चार दिनों तक अधिकतर जिलों में मौसम साफ रहने का पूर्वानुमान है। इससे लोगों को राहत मिलेगी। 30 अगस्त तक मौसम सामान्य बना रहेगा और धूप खिलने के आसार हैं।
उधर, मणिमहेश यात्रा पर आए गुजरात के 60 वर्षीय बुजुर्ग की तबीयत खराब होने से मौत हो गई है। यात्रा से घोड़े पर लौट रहे व्यक्ति की दुनाली मेंतबीयत खराब हो गई। मृतक की पहचान गुरदीप सिंह पुत्र ओंकार गांव आदित्य सोसाइटी भोपाल रोड भरूच गुजरात के रूप में हुई है। एसडीएम भरमौर कुलवीर सिंह ने कहा कि सिविल अस्पताल भरमौर में पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया है।
इस मानसून सीजन में 24 जून से 25 अगस्त तक 372 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। इनमें से 126 की सड़कों हादसों में मौत हो गई। कुल 349 घायल हुए हैं। राज्य में 2400 घर ढह हो गए हैं। 10338 को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अतिरिक्त 303 दुकानों व 5133 गोशालाओं को भी नुकसान हुआ है। मानसून सीजन के दौरान अब तक 8468.25 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। अब तक राज्य में भूस्खलन की 156 और अचानक बाढ़ की 66 घटनाएं सामने आई हैं।