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शिमला-कांगड़ा में बरसे बादल, ऊना में 34 डिग्री पहुंचा पारा

Wed, 12 Aug 2020 06:54 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला/आनी (कुल्लू)
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- फोटो : अमर उजाला
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येलो अलर्ट के बीच बुधवार को प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में मौसम साफ रहा। राजधानी शिमला सहित कांगड़ा और धर्मशाला में हल्की बारिश हुई। प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में धूप खिलने के साथ-साथ बादल भी छाए रहे। वीरवार को भी प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश होने की संभावना है। 18 अगस्त तक पूरे प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहने का पूर्वानुमान है।

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बुधवार को राजधानी शिमला में सुबह के समय मौसम साफ रहा। दोपहर बाद शहर में बादल बरसे। ऊना में अधिकतम तापमान 34.2, भुंतर में 33.7, सुुंदरनगर में 33.1, चंबा में 32.9, कांगड़ा में 31.7, बिलासपुर में 31.5, हमीरपुर में 31.2, सोलन में 30.4, नाहन में 28.5, धर्मशाला-केलांग में 27.4, कल्पा में 25.2, शिमला में 24.0 और डलहौजी में 22.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ।

उधर, मंगलवार रात को गुलेर में 105, अंब में 67, गगल में 63, नयना देवी में 47, नगरोटा सूरियां में 42, बरठीं में 37, नादौन-बिलासपुर में 35, जोगिंद्रनगर में 32, मंडी में 22, ऊना में 21, देहरागोपीपुर में 19, बैजनाथ में 16 और पालमपुर में 15 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड हुई।
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सतलुज में फंसे दो लोगों को सुरक्षित निकाला 
सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ने से बुधवार को दो लोग छांवटी के समीप इसमें फंस गए। सूचना मिलते ही लूहरी में तैनात पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला। जोखिम को देखते हुए फायर ब्रिगेड की गाड़ी को बुलाया गया था लेकिन, उससे पहले ही पुलिस की टीम ने साहस दिखाते हुए दोनों को रेस्क्यू कर दिया। टीम में हेड कांस्टेबल प्रीतम सिंह, कांस्टेबल राजकुमार, कांस्टेबल अजय शामिल रहे। 

हेड कांस्टेबल प्रीतम सिंह का कहना है कि नदी में फंसे लोगों को निकालने में स्थानीय लोगों ने भी साथ दिया। दोनों व्यक्ति स्थानीय हैं और लकड़ी पकड़ने के लिए सतलुज में गए थे। बेहना गांव निवासी दारा सिंह ने सतलुज में तैरकर फंसे हुए लोगों तक रस्सी से बंधी ट्यूब पहुंचाई। इसके बाद ही इन्हें बाहर निकाला जा सका।

उधर, एसडीएम आनी चेत सिंह ने भी पुलिस टीम की सराहना करते हुए लोगों से आग्रह किया है कि वे बरसात के चलते नदी-नालों और सतलुज के पास न जाएं। एसजेवीएनएल प्रबंधन की ओर से भी इस संबंध में चेतावनी दी गई है कि पानी में गाद की मात्रा बढ़ने के कारण नाथपा डैम से कभी भी पानी छोड़ा जा सकता है।

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