किसानों-बागवानों की चिंता बढ़ी
उधर, गुरुवार रात जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र में हुई भारी ओलावृष्टि से गेहूं, जौ सहित तैयार खड़ी नकदी फसलों और फलों के बगीचों को भारी क्षति पहुंची है। क्षेत्र में इन दिनों गेहूं और जौ की फसल पूरी तरह पककर तैयार थी और कटाई का दौर शुरू होने वाला था, लेकिन कुदरत की मार ने सुनहरी फसल को मिट्टी में मिला दिया। हाल ही में रोपी गई टमाटर और शिमला मिर्च की नई पौध भी ओलावृष्टि की भेंट चढ़ गई है। क्षेत्र के मुख्य फल प्लम, खुमानी और आड़ू के पेड़ों पर लगे फलों और पौधों को ओलावृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। अब किसानों की चिंता और बढ़ गई है।
जानें कितने दिन होगी बारिश
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से राज्य में 3 से 7 मई तक बारिश का पूर्वानुमान है। इस दाैरान चोटियों पर बर्फबारी की संभावना है। 8 मई को भी कुछ स्थानों पर माैसम खराब रहने के आसार हैं। 4 मई को राज्य के कई जिलों में ओलावृष्टि और 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का ऑरेंज अलर्ट है। 3 व 5 मई के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 4 मई को कुल्लू, मंडी, शिमला, सोलन व सिरमाैर जिले अंधड़ और ओलावृष्टि का अलर्ट है।
मई में ऐसा रहेगा माैसम, लू वाले दिनों की संख्या सामान्य से अधिक रहने की संभावना
माैसम विभाग के संभावित पूर्वानुमान के अनुसार मई में हिमाचल प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। मई के दौरान हिमाचल की निचली पहाड़ियों, मैदानी इलाकों और मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के कई हिस्सों में औसत अधिकतम तापमान के सामान्य या सामान्य से कम रहने की बहुत अधिक संभावना है। वहीं हिमाचल की ऊंची पहाड़ियों और उनसे सटे मध्य पहाड़ी क्षेत्रों के कई हिस्सों में यह सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। मई के दौरान प्रदेश के मध्य और निचले पहाड़ी/मैदानी इलाकों में लू वाले दिनों की संख्या, दीर्घकालिक औसत की तुलना में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
1901 के बाद से अप्रैल में 47वीं सबसे अधिक वर्षा दर्ज
हिमाचल प्रदेश में 1901 के बाद से अप्रैल में 47वीं सबसे अधिक वर्षा (66.3 मिमी) दर्ज की गई है। 1901 के बाद से अप्रैल महीने में अब तक की सर्वाधिक वर्षा वर्ष 1908 में (181.7 मिमी) दर्ज की गई थी।अप्रैल में राज्य में सामान्य वर्षा (4 फीसदी) दर्ज की गई। महीने के लिए 64 एमएम बारिश को सामान्य माना गया लेकिन वास्तव में 66.3 एमएम वर्षा हुई। ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, मंडी, शिमला, सोलन और सिरमौर जिलों में अत्यधिक वर्षा हुई। कांगड़ा जिले में सामान्य से अधिक बारिश हुईद । वहीं चंबा और कुल्लू जिलों में सामान्य बारिश हुई। किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में वर्षा की कमी रही। 8 अप्रैल को किन्नौर, ऊना, कांगड़ा से लेकर बिलासपुर जिलों में कुछ जगहों पर गंभीर शीत दिवस देखा गया। जबकि 24, 26 और 27 अप्रैल को ऊना और कुल्लू, 24 और 25 अप्रैल को कांगड़ा और 24 अप्रैल को मंडी जिले में लू का प्रकोप देखा गया। 25 अप्रैल को ऊना जिले में भीषण लू का प्रकोप देखा गया।