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हिमाचल विधानसभा: तीसरे दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ा मानसून सत्र

Fri, 25 Aug 2017 10:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन भी सदन की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ गई। वीरवार को भी राज्य विधानसभा की बैठक महज एक घंटे ही चल पाई। न तो प्रश्नकाल की कार्यवाही हुई और न ही दूसरे बिजनेस में विपक्ष ने सहयोग किया।
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तीसरे दिन भी भाजपा के सदस्य नियम 67 के तहत कानून-व्यवस्था पर सारा काम रोककर चर्चा मांगते रहे और सीएम वीरभद्र सिंह को भी कहा कि वे विधायकों के खिलाफ की गई गलत टिप्पणी पर माफी मांगें। वीरवार को 11:00 बजे जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो प्रदेश विधानसभा के स्पीकर बृज बिहारी बुटेल ने प्रश्नकाल का एलान किए बगैर ही कहा कि सीएम सू-मोटो स्टेटमेंट देना चाहते हैं।

इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने बोलना शुरू किया तो विपक्ष ने भारी विरोध किया। विपक्षी भाजपा के विधायकों का यह कहना था कि जब उन्हें नियम 67 के तहत कानून-व्यवस्था विषय पर बोलने की मंजूरी नहीं दी गई तो मुख्यमंत्री किस नियम के तहत वक्तव्य दे रहे हैं। क्या प्रश्नकाल को ही सस्पेंड कर दिया गया है? 
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न तो प्रश्नकाल चला, न ही दूसरे कामकाज हुए

इस पर सीएम वीरभद्र भी विपक्ष की ओर बोले- आपको क्या पता कि मैं क्या स्टेटमेंट देने जा रहा हूं? मैं यह वक्तव्य चेयर की परमिशन से दे रहा हूं। इसके बाद विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही संसदीय कार्य मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सीएम से वक्तव्य लेकर इसे खुद पढ़ना शुरू किया।

सीएम वीरभद्र सिंह धर्मपुर और सरकाघाट क्षेत्र में लड़की का अपहरण करने के बाद दुराचार के मामले में वक्तव्य देना चाह रहे थे। इस वक्तव्य को अग्निहोत्री ने पढ़ते हुए कहा कि इस मामले के आरोपियों को पकड़ दिया गया है। आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद रिमांड पर भेज दिया गया है। इस पर नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि उनके पास प्वाइंट ऑफ  ऑर्डर है।

तीन दिन से वे प्रश्नकाल को निलंबित कर नियम 67 के तहत चर्चा मांग रहे हैं। जब प्रश्नकाल को सस्पेंड नहीं किया गया है तो किस नियम के अंतर्गत सीएम को वक्तव्य देने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री वक्तव्य पढ़ने के काबिल नहीं हैं तो संसदीय कार्य मंत्री को इसे पढ़ने की मंजूरी किसने दे दी? 

शोर-शराबे में ही चलता रहा वक्तव्य

शोर-शराबे के बीच प्रश्नकाल में ही विपक्ष के सदस्य और सत्ता पक्ष के सदस्य इस पर अपने विचार प्रस्तुत करते रहे। स्पीकर बृज बिहारी लाल बुटेल ने भी इसका थोडे़ वक्त तक कोई विरोध नहीं किया।

धर्मपुर के भाजपा विधायक महेंद्र सिंह, कुल्लू के भाजपा विधायक महेश्वर सिंह, देहरा के भाजपा विधायक रविंद्र सिंह रवि, सिराज के भाजपा विधायक जयराम ठाकुर और राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने इस बीच अपने-अपने वक्तव्य शुरू किए।

ऐसा लग रहा था कि मानो सारा बिजनेस स्थगित होकर कानून-व्यवस्था पर चर्चा शुरू हो गई। इस पर धूमल ने स्पीकर का भी धन्यवाद किया कि थोड़ी-थोड़ी करके चर्चा उन्होंने शुरू करवा दी है।

इसके वे धन्यवादी हैं। इसके बाद विपक्ष ने फिर से सारा काम रोककर नियम 67 के तहत चर्चा करवाने को कहा तो स्पीकर ने इससे इनकार करते हुए कहा कि आने वाले कल नियम 62 के तहत चर्चा करवा दी जाएगी। 
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सुरेश भारद्वाज बोले- माफी मांगें सीएम

करीब पौने 12 बजे शोर-शराबा थमता न देख स्पीकर ने कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। 12 बजे कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्ष की बात नहीं मानने पर भाजपा के सभी सदस्यों ने पिछले दो दिनों की तरह फिर से चेयर का घेराव किया। इसके बाद विपक्ष के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि विधायकों के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने पर सीएम माफी मांगें।

उन्होंने ने जनता के चुने हुए भाजपा विधायकों को गुंडे और जंगली तक कह दिया है। उन्होंने नियम 67 में कानून-व्यवस्था पर चर्चा नहीं करवाने का मामला फिर उठाया। स्पीकर ने इससे मना किया तो सदन फिर गरमा गया।

विपक्ष के सदस्य वेल में जाकर नारेबाजी करते रहे। उन्होंने चेयर का भी नारेबाजी के साथ घेराव किया। इसके बाद सदन की कार्यवाही विपक्ष के शोर-शराबे के बीच ही चलती रही। करीब सवा 12 बजे सदन की कार्यवाही को अगले दिन शुक्रवार को 11:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
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