राजकीय अध्यापक संघ से जुड़े शिक्षकों ने बुधवार को काले बिल्ले लगाकर शिक्षक दिवस मनाया। सरकार की मांगों के प्रति उदासीनता के चलते सांकेतिक विरोध दर्ज कराने को शिक्षकों ने काले बिल्ले लगाए। प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि संघ काले बिल्ले लगाकर सरकार को शिक्षा और शिक्षकों की मांगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता याद दिलाना चाहता है न कि कोई टकराव पैदा करना चाहता है।
सरकार संघ की मांगों को पूरा करती है तो हजारों शिक्षक सरकार का धन्यवाद भी पूरे जोश के साथ करेंगे। कहा कि सांकेतिक विरोध प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी स्कूल वाइज ग्रुप फोटो एकत्रित कर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा सचिव के साथ प्रधानमंत्री और मानव विकास संसाधन मंत्री को भेजी जाएगी।
बताया कि बुधवार को प्रदेश के अधिकांश स्कूलों में हजारों शिक्षकों ने काले बिल्ले लगाकर सांकेतिक विरोध जताया। कहा कि 17 अप्रैल और पहली मई को दो बार हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ के साथ शिक्षा और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों पर सचिवालय में शिक्षा सचिव और शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में बैठकें हुईं।
48 सूत्रीय मांगपत्र पर विस्तारपूर्वक चर्चा के बाद कई मांगों को शिक्षा मंत्री ने पूरा करने का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक कोई मांग पूरी नहीं हुई। 38 स्कूल प्रवक्ताओं की एक वर्ष की वार्षिक वेतन वृद्धियां देने पर रोक लगा दी गई है। इसका कारण इस बार उनका बोर्ड परीक्षा परिणाम 25 फीसदी से कम होना बताया गया है। बिना नोटिस और कम परिणाम आने के सही कारणों को बिना जांचे, केवल शिक्षकों को दोषी ठहरा कर सरकार और विभाग शिक्षा के प्रति गलत नीतियों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं।
इस तरह के व्यवहार से घट रहा शिक्षकों का आदर : सीएम
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि शिक्षकों का विरोध जताने का यह रवैया उचित नहीं है। शिक्षक दिवस शिक्षकों के सम्मान में होने वाला दिवस है। मांगे मनवाने और विरोध दर्ज करवाने के लिए साल में अन्य दिन भी होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के इस तरह के व्यवहार के चलते ही उनके प्रति आदर कम हो रहा है।