अदालत ने स्पष्ट किया कि इन नियुक्तियों के आधार पर कोई भी चयनित उम्मीदवार भविष्य में किसी भी प्रकार के स्थायी अधिकार का दावा नहीं कर सकेगा। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि मामले में सरकार ने जवाब दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेने के निर्देश देते हुए कहा कि यदि इसमें कोई आपत्तियां हैं, तो उन्हें दूर किया जाए।
साथ ही याचिकाकर्ता को यदि कोई प्रत्युत्तर देना है, तो वह 4 सप्ताह के भीतर दाखिल किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि निर्धारित समय तक जवाब रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं होता है, तो अदालत उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ही मामले की सुनवाई करेगी। इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी। अदालत के इस आदेश के बाद अब एसएमसी कोटे के तहत होने वाली भर्तियों पर कानूनी प्रक्रिया का सीधा प्रभाव रहेगा।