निजी बस ऑपरेटरों ने अदालत में तर्क दिया था कि हिमाचल पथ परिवहन निगम और बस स्टैंड प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा चलाई जा रहीं ये बसें निर्धारित योजनाओं और पिछले अदालती आदेशों का उल्लंघन कर रही हैं। ऑपरेटरों का कहना था कि इन बसों के संचालन से उनके व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। खंडपीठ ने टिप्पणी की कि जो राहत मुख्य याचिका में मांगी गई है, वही अंतरिम आवेदन में भी मांगी गई थी। कानून के अनुसार, ऐसे मामलों में अंतरिम राहत तभी दी जा सकती है, जब स्थिति बहुत ही असाधारण हो, जो इस मामले में नहीं दिखी। खंडपीठ ने एकल पीठ के उस निर्णय को सही ठहराया, जिसमें कहा गया था कि बसों का संचालन नियमों के खिलाफ है या नहीं, यह प्रतिवादी सरकार का जवाब आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
हिमाचल में आज होगा राष्ट्रीय लोक अदालत
हिमाचल प्रदेश के सभी न्यायालयों में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत लगेगी। राष्ट्रीय लोक अदालत प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संरक्षण मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया एवं कार्यकारी अध्यक्ष न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन में लगेगी। किया जाएगा। लोक अदालत में निपटान के लिए लगभग 63,000 मामलों की पहचान की गई है। ट्रैफिक मजिस्ट्रेट के न्यायालयों में मोटर व्हीकल चालान मामलों में ई-पे (ई-कोर्ट डिजिटल भुगतान) के माध्यम से कंपाउंडिंग शुल्क के भुगतान की ऑनलाइन सुविधा भी प्रदान की गई है। यह जानकारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव और जिला एवं सत्र न्यायाधीश रंजीत सिंह ठाकुर ने दी।