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जनरल हाउस में हुआ सचिवालय कर्मचारी संघ के चुनाव पर फैसला

Wed, 22 May 2019 05:54 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर
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प्रदेश सचिवालय कर्मचारी संघ के चुनाव 20 या 21 जून को कराने का फैसला लिया है। संघ का सदस्यता अभियान 236 से 31 मई तक चलाया जाएगा। जो सदस्य नवीनीकरण कराएंगे, उन्हें चुनाव लड़ने और वोट देने का अधिकार मिलेगा। बुधवार को सचिवालय परिसर में हुए जनरल हाउस में करीब साढे़ आठ सौ कर्मचारी मौजूद रहे। अध्यक्ष संजीव शर्मा ने संगठन की पिछले दो साल की उपलब्धियां गिनाईं। 

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संघ के सदस्यों ने दो साल बाद होने वाले चुनाव 20 या 21 जून को कराने का फैसला लिया है। चुनाव के लिए अंतिम तारीख दो तीन दिन में तय की जाएगी। पहले जून दूसरे हफ्ते में चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इस दौरान अवकाश होने से चुनाव बाद में कराने का फैसला लिया। अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि दो साल में संघ ने कर्मचारी हित में कई काम कराए हैं।

पिछले 12 साल से मांग की जा रही थी कि ग्रामीण विकास विभाग की शाखा सचिवालय में लाई जाए। यह शाखा इसी साल सचिवालय में लाई जा चुकी है। 12 साल से नौकरी कर रहे सहायकों को वरिष्ठ सहायक पदोन्नत करने को नौ साल की सेवा शर्त रखा दी है। इससे चालीस कर्मचारियों का लाभ मिला है। 17 पद अधीक्षक के सृजित कराए गए। इनमें 6 पद रेगुलर आधार पर भरे गए हैं।
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पहले ठेके पर कर्मचारियों को मई तक रेगुलर किया जाता था, लेकिन इस साल एक अप्रैल को रेगुलर कराया गया है। सरकार किसी कर्मचारी की नौकरी के दौरान मृत्यु पर आश्रितों में से एक को नौकरी देगी। पहले सरकार ने 50 साल की सेवा के बाद आश्रितों को नौकरी नहीं देने का फैसला लिया था।

मुख्यमंत्री ने संघ के सम्मेलन में कर्मचारियों को तीन फीसदी डीए देने की घोषणा की है। इस दौरान वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेश कुमार, महासचिव कमल कृष्ण, उपाध्यक्ष चानन मेहता, संयुक्त सचिव विनय  कुमार ने भी विचार रखे। कोषाध्यक्ष मिलाप चौधरी ने संघ का लेखा-जोखा रखा। 

प्रशासनिक ट्रिब्यूनल बंद किया तो आंदोलन
प्रदेश सचिवालय कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि सरकार ने प्रशासनिक ट्ब्यिूनल बंद किया तो कर्मचारी आंदोलन करेंगे। सरकार ने कर्मचारियों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए प्रशासनिक ट्रिब्यूनल का गठन किया था।

कहा कि प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को सरकार बंद करती है तो इससे हजारों कर्मचारियों पर विपरीत असर पड़ेगा। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में केस लड़ने के लिए कर्मचारियों को पांच हजार रुपये देकर वकील मिल जाता है। अगर हाईकोर्ट का वकील करना पड़े तो कर्मचारियों को पचीस हजार देकर वकील करना पड़ता है।

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