अगले सेब सीजन से यूनिवर्सल कार्टन को अनिवार्य तौर पर लागू करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से विधानसभा में कानून बनाने के फैसले से बागवानों को दोहरा लाभ होगा। यूनिवर्सल कार्टन लागू होने से जहां पेटियों में अतिरिक्त सेब भरने से छुटकारा मिलेगा, वहीं मंडियों में दाम भी अच्छे मिलेंगे। सरकार के फैसले का संयुक्त किसान मंच सहित बागवान संगठनों ने स्वागत किया है। इससे किलो के हिसाब से सेब बेचने की व्यवस्था लागू करने में भी सुविधा होगी। हर पेटी का वजन करने से भी छुटकारा मिलेगा। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने मानसून सत्र में ऐलान किया था कि अगले सीजन से टेलीस्कोपिक कार्टन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा और सेब सिर्फ यूनिवर्सल कार्टन में बिकेगा।
बागवानों के हित में बड़ा फैसला
फैसला बड़ा है। यूनिवर्सल कार्टन लागू होने से बागवान क्वालिटी सेब पैदा करेंगे। इंटरनेशनल ग्रेड लागू होने से फसल के अच्छे दाम मिलेंगे। संयुक्त किसान मंच अब सिंगल यूज प्लास्टिक क्रेट लागू करने के लिए संघर्ष करेगा।
-हरीश चौहान, संयोजक, संयुक्त किसान मंच
एमआईएस रेट भी 21 रुपये हो
छोटे सेब के लिए एमआईएस का रेट 21 रुपये तय होना चाहिए। एक किलो सेब उत्पादन की लागत 20 से 25 रुपये हो है। वजन के हिसाब से सेब ढुलाई का नियम प्रभावी तरीके से लागू होने पर ही बागवानों को पूरी राहत मिलेगी।
- लोकेंद्र बिष्ट, अध्यक्ष, पीजीए
प्रदेश से बाहर भी कार्टन में जाएं सेब
सरकार का कानून बनाने का फैसला स्वागत योग्य है। आढ़तियों और लदानियों ने गठजोड़ कर इसके खिलाफ माहौल तैयार किया। प्रदेश ही नहीं बाहरी राज्यों में भी सेब सिर्फ यूनिवर्सल कार्टन में ही जाना चाहिए।
- सोहन ठाकुर, अध्यक्ष, सेब उत्पादक संघ
प्रभावी तरीके से लागू हों एक्ट
प्रदेश सरकार अगर इच्छाशक्ति दिखाते हुए एपीएमसी एक्ट, लीगल मेट्रोलॉजिकल एक्ट 2009 और कंपीटिशन एक्ट 2002 को प्रभावी तरीके से लागू करे तो सेब बागवानी की सूरत बदल सकती है।
- संजय मेहता, प्रगतिशील बागवान, कोटगढ़