सरकार की लापरवाही और एचआरटीसी कर्मचारियों की जिद्द आखिर आम पब्लिक पर भारी पड़ी। हिमाचल हाईकोर्ट ने हड़ताल पर रोक भी लगाई लेकिन कर्मचारी आदेशों की धज्जियां उड़ाकर सड़क पर उतर गए। सरकारी बसों के पहिए रुक गए। करीब दो सौ वोल्वो बसों के न चलने से सैकड़ों पर्यटक बीच में फंस गए।
बीते 27 मई से सरकार के पास वैकल्पिक व्यवस्था के लिए लंबा वक्त था लेकिन इंतजाम शून्य रहे। सोमवार रात 12:00 बजे से शुरू हुई यह हड़ताल बुधवार को भी जारी रहेगी। मुसाफिरों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। राजधानी शिमला में संयुक्त समन्वय समिति के बनैर तले कर्मचारियों ने एचआरटीसी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
सुबह 11:00 बजे ओल्ड बस अड्डे पर भी एकत्र होकर शाम पांच बजे तक प्रदेश सरकार और निगम प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की गई। सभी जिला मुख्यालयों भी ड्राइवर-कंडक्टरों के अलावा दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी भी सड़क पर उतर आए। बाहरी राज्यों से आने वाली बसों को परवाणू में रोकने की कोशिश की गई, लेकिन ये बसें प्रदेश भर में करीब 500 रूटों पर दौड़ती रहीं।
ये हैं मुख्य मांगें
एचआरटीसी को रोडवेज बनाया जाए
अन्य विभागों की तर्ज पर निगम के अनुबंध कर्मियों को समान वेतन मिले
पेंशन, मासिक वेतन, घोषित वित्तीय लाभों का एकमुश्त भुगतान हो
कार्यशालाओं की मरम्मत
सभी बसों का बीमा
जीपीएफ राशि जमा कराएं, पीस मील वर्करों को अनुबंध पर लाया जाए
ओवरटाइम, विशेष वेतन वृद्धि का लाभ तुरंत दिया जाए
करुणामूलक आधार पर तैनाती जल्द की जाए