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हाईकोर्ट के आदेशों को अनदेखा कर एचआरटीसी कर्मचारी हड़ताल पर

Tue, 14 Jun 2016 07:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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14 और 15 जून को 48 घंटे बस सेवा बंद रहेगी। - फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद एचआरटीसी कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। परिवहन मजदूर संघ के अध्यक्ष शंकर सिंह ठाकुर ने बताया कि कर्मचारी दो दिन काम छोड़ हड़ताल पर जा रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश उन्हें अभी नहीं मिले हैं।
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सर्व कर्मचारी महासंघ के महासचिव खेमेंद्र गुप्ता और एचआरटीसी तकनीकी कर्मचारी महासंघ के उपाध्यक्ष राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि हड़ताल होगी। बाहरी राज्यों से आने वाली सरकारी बसों को भी हिमाचल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

प्रदेश में एचआरटीसी की कोई भी बस नहीं चल रही है। लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को दिए गए आदेशों में हाईकोर्ट ने कहा था कि कर्मचारी अपनी मांगें थोपने के लिए हड़ताल पर नहीं जा सकते।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचआरटीसी कर्मचारियों की ओर से प्रस्तावित दो दिवसीय (14 और 15 जून) हड़ताल पर रोक लगा दी थी।। सोमवार को एक सप्ताह की छुट्टियों के बाद खुले हाईकोर्ट ने प्रस्तावित चक्का जाम की खबरों पर संज्ञान लेते हुए स्पष्ट किया था कि कोई भी कानून कर्मचारियों को अपनी मांगें मनवाने के लिए हड़ताल पर जाने की इजाजत नहीं देता।

मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने प्रस्तावित हड़ताल की खबरों के मद्देनजर सरकार, एचआरटीसी और कर्मचारियों की संयुक्त समन्वयन समिति को नोटिस जारी किए थे। हाईकोर्ट ने सरकार व एचआरटीसी प्रशासन को आदेश दिए थे की 20 जून से पहले कर्मचारियों से बात करें और उनकी तर्कसंगत मांगों को सुलझाने की कोशिश करें।

हाईकोर्ट ने कहा था कि डॉक्टरों की हड़ताल को भी प्रदेश हाईकोर्ट गैरकानूनी घोषित कर चुका है। देश का कानून यह है की कर्मचारी अपनी मांगें थोपने के लिए हड़ताल पर नहीं जा सकते। इसी कानून के मद्देनजर हाईकोर्ट ने कम्यूनिटी इनिशिएटिव ट्रस्ट द्वारा दायर याचिका में सरकार, एचआरटीसी और कर्मचारियों की संयुक्त समन्वयन समिति को नोटिस जारी किए गए थे।
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प्रार्थी का तर्क, दूरवर्ती इलाकों में फंसें हजारों लोगों को होगी असुविधा

हाईकोर्ट
प्रार्थी संस्था द्वारा कोर्ट के समक्ष रखे तथ्यों के अनुसार एचआरटीसी प्रदेश में परिवहन सेवाओं के निजीकरण के बावजूद एकमात्र ऐसा सार्वजनिक उपक्रम है जिसके माध्यम से प्रदेश की जनता को बड़े पैमाने पर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। गरीब हो या अमीर, छात्र हो या कर्मचारी, शहरी क्षेत्र हो या ग्रामीण, सक्षम हो या दिव्यांग एचआरटीसी के माध्यम से सभी उचित दरों पर परिवहन सेवाओं का लाभ उठाते हैं।

एचआरटीसी की बसें प्रतिदिन के हिसाब से 2250 रूटों पर चलती हैं जिससे हर रोज डेढ़ करोड़ के करीब धन एकत्रित किया जाता है। एचआरटीसी के पास घाटे के करीब 1100 रूट हैं, जिनसे दूरवर्ती इलाकों के लोगों को फायदा पहुंचता है। प्रार्थी संस्था ने कोर्ट को बताया था कि चक्का जाम और हड़ताल से दूरवर्ती इलाकों में फंसें हजारों लोगों को असुविधा होगी और लाखों छात्र इससे प्रभावित होंगे।

प्रार्थी ने कोर्ट से मांग की थी कि कर्मचारियों की संयुक्त समन्वयन समिति को आदेश दिए जाएं की वह चक्का जाम जैसी गैरकानूनी गतिविधियों में संलिप्त होकर हड़ताल पर न जाए। प्रार्थी ने 14 व 15 जून की प्रस्तावित हड़ताल को गैरकानूनी घोषित करने की गुहार भी लगाई थी ताकि प्रदेश में परिवहन सेवाएं निर्बाध जारी रह सकें। मामले पर अगली सुनवाई 20 जून को निर्धारित की गई है।
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बाली बोले, माहौल खराब करना चाहते हैं कर्मचारी नेता

परिवहन मंत्री जीएस बाली - फोटो : अमर उजाला
एचआरटीसी कर्मचारियों की ओर से 14 और 15 जून को बुलाई गई प्रदेशव्यापी हड़ताल पर हाईकोर्ट के स्टे का परिवहन मंत्री जीएस बाली ने स्वागत किया था। उन्होंने कहा था कि मैं एचआरटीसी कर्मचारियों को अपना परिवार मानता हूं। कर्मचारियों की 90 प्रतिशत मांगें मान ली हैं। इनमें जो मांगें नहीं मानने वाली थीं वे भी मान ली हैं।

कर्मचारी दिन-रात लोगों की सेवा में लगे रहते हैं, लेकिन कुछ कर्मचारी नेता माहौल खराब करना चाह रहे हैं। ये नेता चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। शौक से चुनाव लड़ें, लेकिन काम में कोताही बर्दाश्त नहीं होगी। हाईकोर्ट के फैसले के दूरगामी परिणाम होंगे। यात्रियों और छात्रों को राहत मिलेगी। एचआरटीसी कर्मचारी काम पर लौटकर अपना पक्ष प्रबंधन के समक्ष रखें।

निगम को रोडवेज में बदलना संभव नहीं
एचआरटीसी कर्मियों की हड़ताल मामले में सीएम वीरभद्र ने कहा था कि परिवहन निगम को रोडवेज में बदलने की मांग को पूरा करना अब संभव नहीं है। भाजपा सरकार ने ही रोडवेज को खत्म करके निगम बनाया था। हड़तालियों की जायज मांगों और समस्याओं का निपटारा किया जाएगा।
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