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हिमाचल: निजी शिक्षण संस्थानों में न फर्जी दाखिले होंगे, न हड़प सकेंगे छात्रवृत्ति

Fri, 14 May 2021 10:59 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के लिए यह योजना बनाई गई है। इस तकनीक से फर्जी डिग्रियों का खेल भी खत्म होगा। नियमों की अवहेलना होते ही आयोग के पास अलर्ट आ जाएगा। 
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हिमाचल निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों में फर्जी दाखिलों का खेल रोकने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने इन्फार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम बनाने का काम शुरू कर दिया है। राज्य इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन को इसका जिम्मा सौंपा गया है। इस सिस्टम के तहत निजी संस्थानों के विद्यार्थियों, शिक्षकों की हाजिरी से लेकर छात्रवृत्ति का रिकॉर्ड अपलोड होगा। एक क्लिक से आयोग कहीं से भी इसकी मानीटरिंग कर सकेगा।

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इसके अलावा निजी संस्थानों की मान्यता, संबद्धता, नियमों, आधारभूत सुविधाओं की आम जनता को भी एक क्लिक पर जानकारी मिल जाएगी। इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन की ओर से जारी पत्र में बताया गया है कि विनियामक आयोग के लिए ई गवर्नेंस सिस्टम बनाया जाना है। इसके तहत आयोग से ली जाने वाली विभिन्न मंजूरियां भविष्य में ऑनलाइन ही मिल जाएंगी। आयोग के निर्देशों का पालन कितना हुआ, इसकी जानकारी भी निजी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन को यहीं देनी होगी।

शिकायत करने को लेकर भी इस सिस्टम में सुविधा दी जाएगी। सभी निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का डाटा यहां अपलोड होगा। कहां से मान्यता मिली है, संबद्धता कहां से ली है, कौन से कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं, शिक्षक कितने हैं, आधारभूत ढांचा किस प्रकार का है, कानूनी मामले चल रहे हैं या नहीं, इसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी। निजी संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का कोर्स के अनुसार आधार कार्ड नंबर सहित ब्योरा, विदेशी छात्रों की अलग से जानकारी भी देनी होगी। आरटीआई का स्टेटस भी बताना होगा।
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विद्यार्थियों की हाजिरी, परीक्षा, डिग्री देने के समय की जानकारी भी देनी होगी।  शिक्षकों की हाजिरी, शैक्षणिक योग्यता, वेतन की जानकारी भी यहां मिलेगी। छात्रवृत्ति को लेकर भी पूरी जानकारी देनी होगी। कौन-कौन पात्र हैं, कौन सी योजना का लाभ लिया जा रहा है, आधार नंबर के साथ विद्यार्थियों का नाम और पता देना होगा। निजी शिक्षण संस्थानों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही के लिए यह योजना बनाई गई है। इस तकनीक से फर्जी डिग्रियों का खेल भी खत्म होगा। नियमों की अवहेलना होते ही आयोग के पास अलर्ट आ जाएगा। 

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