गर्भवती महिला को पालकी में उठाकर सड़क तक पहुंचाया।
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हिमाचल के चंबा जिले के खज्जियार में सड़क के अभाव में एक गर्भवती महिला को परिजनों और ग्रामीणों ने आठ किमी तक पालकी में उठाकर मंगला पहुंचाया। यहां से निजी वाहन से चंबा मेडिकल कॉलेज लाया गया। चंबा जिले के टपूण गांव को आज तक कोई भी सरकार सड़क से नहीं जोड़ पाई है। ग्रामीणों को सड़क तक पहुंचने के लिए आज भी आठ किमी का सफर पैदल तय करना पड़ता है। शनिवार सुबह पांच बजे टपूण गांव में रजनी पत्नी दीप कुमार को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव में सड़क न होने से परिजन एंबुलेंस को भी फोन नहीं कर पाए। इसके चलते परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से गर्भवती महिला को पालकी के सहारे अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। परिजन व ग्रामीण गर्भवती को पालकी में उठाकर अस्पताल की तरफ रवाना हुए।
आठ घंटे पैदल चलकर ग्रामीणों ने महिला को मंगला गांव में पहुंचाया। यहां से उसे अस्पताल पहुंचाने के लिए निजी वाहन की व्यवस्था की गई। निजी वाहन से महिला को चंबा मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। ग्रामीणों में संजू कुमार, संजीव कुमार, रमेश, अमित, अनिल, प्यार चंद, जोगिंद्र, किरपा राम, दीपक व रिंकू ने सरकार व प्रशासन से उपरोक्त सड़क बनाने की मांग की है। उधर, लोनिवि के सहायक अभियंता मीत कुमार ने बताया कि टपूण गांव तक सड़क बनाने को लेकर विभाग की ओर से सभी औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। वन विभाग से एनओसी भी मिल गया है। कुछ लोग निजी भूमि विभाग के नाम नहीं कर रहे हैं। इस कारण सड़क का कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।