ब्यूरो की अब तक की जांच में कई ऐसी फर्में मिली हैं जिनके पास एक छोटा कमरा तक नहीं था। यही नहीं उनके पास रिकॉर्ड भी सही नहीं था, जिससे ये साबित हो सके कि किस समय शराब आई या उसे वितरित किया गया।
नाम न लिखने की शर्त पर एक अधिकारी ने बताया कि मामले में जांच चल रही है और अगले दो महीने में रिपोर्ट सरकार को सौंपी जा सकती है। बता दें कि प्रमुख सचिव विजिलेंस संजय कुंडू खुद इस मामले की समीक्षा कर अधिकारियों को जांच में तेजी लाने के निर्देश देते रहे हैं।
ऐसे चलता था लूटखसोट का खेल
सूत्रों की मानें तो अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि शराब सीधे प्लांट से आती और इसे स्टोर करने के बजाय वेंडर को सीधे सप्लाई कर दिया जाता। कागजों में उसे स्टोर किया गया दिखाया जाता और फिर सप्लाई भी कागजों में ही दिखा दी जाती। इसके बदले में बिना कोई मेहनत या भवन के उन्हें कारपोरेशन से हर बार प्रति बोतल के हिसाब से पैसा अदा कर दिया जाता।