नौ कार्यकर्ताओं के निष्कासन के विरोध में भड़के एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को परिसर में प्रदर्शन किया। एबीवीपी की विवि इकाई के कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय के बाहर करीब बारह बजे पहुंच कर निष्कासन को तुरंत वापस लेने की मांग की और उग्र हुए कार्यकर्ताओं ने कुलपति कार्यालय में कड़े सुरक्षा इंतजाम के बावजूद घुसने का प्रयास किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और सुरक्षा कर्मियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।
इसके बाद कार्यकर्ताओं ने कुलसचिव कार्यालय में जाकर भी प्रदर्शन किया। पुस्तकालय के बाहर एकत्र हो कर विवि प्रशासन के खिलाफ जमकर धरना प्रदर्शन किया। निष्कासित छात्रों की सूची में शामिल इकाई सचिव अंकित चंदेल इस दौरान कहा कि विवि प्रशासन का यह तानाशाही पूर्ण और एकतरफा फैसला है। 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैं पस में यूजी छात्रों के लटके परिणाम को लेकर धरना प्रदर्शन कर रिजल्ट जल्द घोषित करने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि विवि प्रशासन कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर छात्रों का निष्कासन कर रहा है, लेकिन कर्मचारियों पर ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होने भी कुलपति कार्यालय प्रशासनिक भवन में नारेबाजी की थी। यह एकतरफा और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई है। विवि प्रशासन अपनी यूजी के परिणाम घोषित न कर पाने की नाकामी को छुपाने को निष्कासन कर आम छात्रों का ध्यान भंग करना चाह रहा है, ताकि उनका कोई विरोध न कर पाए।
अधुरे यूजी के परीक्षा परिणाम को घोषित कर वाहवाही लूट रहा विश्वविद्यालय प्रशासन मुश्किल से 25 से 30 फीसदी छात्रों के ही छठे सेमेस्टर के परिणाम को घोषित कर पाया है। कुलपति के 9 महीने में पीएचडी और एमसीए फर्जी तरीके से प्रवेश के आरोप लगने के बाद छात्र संगठनों की आवाजा को दबाने को कुलपति ने परिसर में धरने प्रदर्शनों पर रोक लगा दी। एबीवीपी ने विवि प्रशासन व कुलपति को चेताया है कि यदि ये निष्कासन वापस न लिया और यूजी के अधूरे परीक्षा परिणाम पूरे घोषित नहीं करती तो एबीवीपी प्रदेश भर में उग्र आंदोलन खड़ा करेगी।
अंजना चौहान की अपील पर प्रतिबंधित किए हैं प्रदर्शन
शिमला । हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंजना चौहान की उच्च न्यायालय में 2004 में दायर याचिका पर 2008 में दिए गए आदेशों को आधार बना कर परिसर में कुलपति कार्यालय, प्रशासनिक भवन विवि पुस्तकालय के आस पास के तय दायरे के भीतर धरने प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी।