शीतकालीन सत्र के पहले दिन सदन में कांग्रेस पार्टी की ओर से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने के विरोध में विपक्ष ने सदन के बाहर आकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष प्रदेश के मुद्दों पर विस्तृत चर्चा करना चाहता है, लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है। कांग्रेस के 22 विधायकों के अलावा माकपा विधायक राकेश सिंघा ने भी इस प्रस्ताव के लिए समर्थन दिया था। सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश करने के लिए एक तिहाई बहुमत के बावजूद विस अध्यक्ष ने इस पर चर्चा नहीं होने दी। विस अध्यक्ष विपिन परमार ने सबको सदन में बात रखने की बात कही, लेकिन बाद में उन्होंने भी रूलिंग देनी शुरू कर दी।
उन्होंने कहा कि सरकार विश्वास मत खो चुकी है। उपचुनावों में मुख्यमंत्री के गृहक्षेत्र सहित चारों सीटों पर भाजपा की हार हुई है। हर कोने की जनता ने इन्हें नकारा है। उपचुनाव में हार के बाद केंद्र सरकार को मजबूरन डीजल और पेट्रोल के दाम घटाने और तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े। सरकार को जेसीसी की बैठक बुलाकर कर्मचारियों की मांगें माननी पड़ीं। अभी भी न पुलिस जवानों की वेतन विसंगतियों की सुनवाई हो रही है और न ही आउटसोर्स कर्मचारियों पर सरकार कोई नीति ला पाई है। रेत, शराब, वन, ट्रांसफर और ठेकेदार माफिया से प्रदेश में लूट का माहौल है। मुख्यमंत्री और इनके कैबिनेट मंत्रियों को पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार भारी-भरकम कर्जे ले रही है। उद्योगों के विकास के लिए कुछ नहीं किया गया। प्रदेश में कोई हवाई पट्टी, फोरलेन और रेल लाइन में विस्तार नहीं किया गया। सदन के बाहर धरने हो रहे हैं। विधायकों को समय पर विधानसभा तक पहुंचाने में भी सरकार नाकाम रही है। सरकार जब हर मोर्चे पर विफल हो गई तो विपक्ष की ओर से सदन में अविश्वास मत लाया गया। प्रस्ताव पेश करने के लिए हमारे पास सदन में पर्याप्त संख्या है। बावजूद इसके सदन में अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।