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बजट सत्र: संस्थानों को बंद करने पर विपक्ष का काम रोको प्रस्ताव मंजूर, दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक

Wed, 15 Mar 2023 06:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

बुधवार को सदन में दिनभर भाजपा और कांग्रेस के विधायकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। सत्र के दूसरे दिन बुधवार को भी प्रश्नकाल नहीं हुआ।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन भी सदन में गतिरोध बरकरार रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नकाल के एलान से पहले विपक्ष ने सरकारी संस्थानों को डिनोटिफाई करने के मामले में नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पर सारा काम रोककर चर्चा मांगी। शुरू में सत्तारूढ़ दल कांग्रेस के विधायक इसका विरोध करते रहे। जैसे ही हंगामा बढ़ने लगा तो कांग्रेस विधायक दल ने नहले पर दहला फेंकते हुए इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिए सहमति दर्ज कर दी।

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विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इस प्रस्ताव को मंजूर किया तो पूरे दिन केवल इसी एक ही विषय पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान दोनों पक्षों में तीखी नोकझोंक होती रही। सत्र के दूसरे दिन बुधवार को भी प्रश्नकाल नहीं हुआ। 920 संस्थानों और कार्यालयों को बंद करने पर बिफरे विपक्ष ने काम रोको प्रस्ताव लाकर इस मुद्दे पर चर्चा की। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने भाजपा विधायकों के नोटिस पर नियम 67 के तहत चर्चा को मंजूर करते हुए बुधवार के सारे सूचीबद्ध कार्यों को स्थगित कर दिया।

बुधवार को सदन में दिनभर भाजपा और कांग्रेस के विधायकों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। भाजपा विधायकों ने अप्रैल 2022 के बाद खुले और स्तरोन्नत हुए 920 संस्थानों को बंद करने का विरोध करते हुए वीरभद्र सरकार के समय खुले संस्थानों को सुचारु तौर पर चलाने की बात कही। उधर, कांग्रेस विधायकों ने पलटवार करते हुए बिना बजट प्रावधान किए संस्थान खोल कर राजनीतिक हित साधने का पूर्व की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया।
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पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का भी नहीं रखा सम्मान : सुखराम
पांवटा से भाजपा विधायक सुखराम चौधरी ने काम रोको प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कहा कि कांग्रेस सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का भी सम्मान नहीं रखा। वीरभद्र कई बार सदन में कहते थे कि अगर एक बच्चे के लिए भी स्कूल खोलना पड़ा तो खोलूंगा। जिसने भी सीएम सुक्खू को संस्थान बंद करने का विचार दिया है, वह मुख्यमंत्री का हितैषी नहीं हो सकता। कोरोना संकट के चलते प्रदेश में दो साल तक कामकाज ठप रहा।

पूर्व सरकार ने कोरोना से प्रदेश को उभारा। स्थितियां ठीक होने पर अंतिम वर्ष में 900 संस्थान खोले। कहा कि 2012 में जब धूमल सरकार गई थी, तब प्रदेश पर 27 हजार करोड़ कर्ज था। 2017 में वीरभद्र सरकार के जाने पर कर्ज 48 हजार करोड़ था। पूर्व कांग्रेस सरकार ने 21 हजार करोड़ कर्ज लिया था। वीरभद्र सरकार ने जाते-जाते 350 से अधिक संस्थान खोले। एक-एक कमरे में डिग्री कॉलेज खोले गए। जयराम सरकार ने इनमें 95 फीसदी संस्थानों को जारी रखा। वर्तमान सरकार पहले दिन से आर्थिक बदहाली का शोर मचा रही है। यह सरकार बहानेबाजी की सरकार बन गई है।

लोगों को ठगने के लिए धड़ाधड़ खोले गए संस्थान : धर्माणी
घुमारवीं से कांग्रेस विधायक राजेश धर्माणी ने कहा कि विपक्ष का ध्यान सिर्फ समाचारपत्रों की सुर्खियां बनाने पर है। दो दिन कई अहम प्रश्नों पर चर्चा नहीं हो सकी। पूर्व भाजपा सरकार ने चुनाव से पहले बिना वित्तीय प्रावधान संस्थान खोले। इस कारण अनुपूरक बजट बढ़ा। कहा कि अक्तूबर 2021 में मंडी संसदीय सीट सहित तीन जगह उपचुनाव हुए। पूर्व भाजपा सरकार को चारों सीटों पर हार मिली।

भाजपा ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने और वित्तीय प्रबंधन को ठीक करने की जगह लोगों को ठगने के लिए धड़ाधड़ संस्थान खोलने पर जोर दिया। जिसने कभी गाय की सेवा नहीं की, वह अंत समय में गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करना चाहता है। सुखराम चौधरी के बयान पर पलटवार करते हुए धर्माणी ने कहा कि कोरोना संकट के समय प्रदेश में अव्यवस्था और असंवेदनशीलता देखने को मिली।

एम्स में 78 डॉक्टर होने के बावजूद उनकी सेवाएं नहीं लीं। केंद्र से मिले वेंटिलेटर चलाए नहीं गए। गो सदनों में पशुधन की मौत के आंकड़े लगातार बढ़ते गए। ऐसे स्कूल अपग्रेड किए, जहां कोई दाखिला नहीं था। वहां छह शिक्षकों का स्टाफ भी नियुक्त कर दिया। 155 कॉलेजों में से आजकल 119 में प्रिंसिपल नहीं हैं। सरकार ने अपने अधीन लिए घुमारवीं के संस्कृत कॉलेज के शिक्षकों को अभी तक वेतन नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द समीक्षा कर जरूरत वाले संस्थानों को जनता के हित में खोलेगी।

फैसलों को जनता देख रही, 2024 में मिल जाएगा जवाब : कटवाल
शिमला। झंडूता से भाजपा विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि संस्थान बंद करने के फैसले को जनता और वक्त दोनों देख रहे हैं। मई 2024 के चुनाव में कांग्रेस सरकार को इसका जवाब मिल जाएगा। संस्थान बंद करने का फैसला पहली बार देखा है। पूर्व कांग्रेस सरकार ने सात अक्तूबर 2017 को चुनाव से पहले 21 कॉलेज खोले थे। 70 अन्य संस्थान भी इसी दिन शिमला से एक साथ खोले गए। बल्हसीना कॉलेज को बंद करने का विरोध करते हुए कटवाल ने कहा कि यहां छह कमरे पहले थे, छह का निर्माण जारी है।

बीच सत्र में कॉलेजों में दाखिले नहीं होते। नए सत्र से दाखिले बढ़ने थे, लेकिन सरकार ने इसे बंद कर दिया। विधायक क्षेत्र विकास निधि विधायकों को अपने लिए नहीं मिलती। यह निधि विकास कार्यों के लिए होती है। कोरोना संकट के दौरान बेहतर कार्य करने का प्रदेश के नाम रिकॉर्ड है। कई पुरस्कार भी मिले हैं। संस्थानों को बंद करने का फैसला अविवेकपूर्ण है। संस्थानों को बंद करने से पहले सरकार को उनकी समीक्षा करनी चाहिए। कटवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की धमकियों के चलते बिलासपुर में डॉक्टरों ने नौकरी तक छोड़ दी।

प्रदेश पर छोड़े अपने कर्ज को भी देखे भाजपा : लखनपाल
शिमला। बड़सर से कांग्रेस विधायक आईडी लखनपाल ने कहा कि भाजपा को प्रदेश पर छोड़े गए अपने कर्ज को भी देखना चाहिए। पूर्व सरकार ने नियम 67 के तहत कांग्रेस को बोलने का मौका नहीं दिया। विधानसभा अध्यक्ष और मुख्यमंत्री ने चर्चा को मंजूर कर दरियादिली दिखाई है। जितने भी संस्थान बंद किए गए हैं, उनकी समीक्षा की जाएगी। बजट और स्टाफ का उचित प्रबंध किया जाएगा। मुख्यमंत्री की ओर से पेश किए जाने वाले बजट में यह सब स्पष्ट हो जाएगा।

लखनपाल ने कहा कि विधायक क्षेत्र विकास निधि को रोका गया है, इसे बंद नहीं किया गया है। झूठी वाहवाही लेने के लिए डबल इंजन की सरकार की बातें ही भाजपा ने कही। हिमाचल के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं लाया। प्रदेश में केवल जुमले की सरकार बनाई। कहते थे कि 20 साल के लिए सत्ता में आए हैं, पर जनता ने बाहर का रास्ता दिखा दिया। आज स्कूलों में जेबीटी अध्यापक नहीं हैं। जितने भी संस्थान खोले हैं, उनमें भी यही स्थिति है। नियम 67 में लाई गई चर्चा में कोई दम नहीं है।

अगर संस्थानों को नहीं खोला तो आमरण अनशन पर बैठूंगा मैं : हसंराज
चुराह से भाजपा विधायक हंसराज ने कहा कि अगर संस्थानों को नहीं खोला और विधायक क्षेत्र विकास निधि जल्द जारी नहीं हुई तो मैं आमरण अनशन पर बैठ जाऊंगा। कहा कि सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मुख्यमंत्री बनने पर मुझे सबसे अधिक खुशी हुई। राजघराने की जगह एक ड्राइवर के बेटे को कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बनाया। वह विपक्ष में रहकर प्रदेश के हित देखते थे, अब बदल गए हैं। सदा के लिए कोई मुख्यमंत्री नहीं बन जाता है। न्याय तो तब होगा, जब आप नादौन ही न देखें। नहीं तो लोग इस इंतजार में रहेंगे कि कब चुराह से मुख्यमंत्री बनेगा।

कहा कि मुख्यमंत्री बनने के अब सुक्खू ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू हो गए हैं। हिमाचल अब हमाचल हो गया है। व्यवस्था परिवर्तन के साथ नाम परिवर्तन भी हो गया है। पहले अफसरशाही पर बहुुत बोलते थे। अफसर पहले भी गुमराह करते थे, अब भी गुमराह कर रहे हैं। कहा कि वीरभद्र सरकार 47 हजार करोड़ का कर्ज छोड़कर गई थी। छह किलोमीटर की दूरी पर डलहौजी में कॉलेज खोले गए। जयराम ठाकुर ने उन्हें बंद नहीं किया।

शपथ लेने के बाद सुक्खू सरकार ने तीन माह में साढ़े चार हजार करोड़ का कर्ज ले लिया है। बजट न होने की बात कहकर संस्थान बंद किए जा रहे हैं, जबकि कई मुख्य संसदीय सचिव बना दिए हैं। चंबा में दफ्तर बंद होने से लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिजली की समस्याओं के लिए लोगों को भटकना पड़ रहा है। ट्रांसफार्मर न होने से कई गांवों में अंधेरा पसरा है। अगर मैं गलत बोल रहा हूंगा तो इस्तीफा दे दूंगा। बर्फबारी के दौरान इस बार जिले में कई दिनों तक सड़कें नहीं खुलीं। मंडी शिवधाम का पैसा मुख्यमंत्री नादौन ले गए हैं। अगर आकांक्षी जिला चंबा से कुलदीप सिंह पठानिया को विधानसभा अध्यक्ष की जगह मंत्री बनाते तो मैं कांग्रेस सरकार को मानता।

अफसर दीर्घा में फोन सुनने पर जयराम ने जताई आपत्ति
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने विधानसभा सदन में अफसर दीर्घा में बैठकर फोन सुनने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि एक अफसर सदन में बैठकर मोबाइल फोन पर बात कर हैं। इस तरह का आचरण ठीक नहीं है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। सदन में बैठकर फोन का इस्तेमाल न किया जाए।

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