हिमाचल प्रदेश में चल रही पानी की स्कीमों को जलशक्ति विभाग आपस में इंटरलिंक करेगा। मंत्री महेंद्र सिंह ने सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान कहा कि प्रदेश में अभी से सूखे के हालात हैं। अगर बारिश न हुई तो कई स्कीमें सूख सकती हैं। चालू स्कीमों को सूखी स्कीमों से जोड़ने के लिए पाइप भी बिछाए जाएंगे। जल जीवन मिशन में 15 अगस्त, 2022 तक हर घर में नल और 2024 तक हर नल में पानी के लिए आगमेंटेशन स्कीमों को पूरा कर लिया जाएगा।
मंडी सदर के विधायक अनिल शर्मा ने मंडी शहर के लिए शुरू हुई पानी की स्कीम से बल्ह विधानसभा क्षेत्र में सप्लाई पर सवाल उठाया। मंत्री ने कहा कि जिस क्षेत्र की बात सदस्य कर रहे हैं, वह अब मंडी नगर निगम क्षेत्र में है। सरकार का काम हर नागरिक तक पानी पहुंचाना है। अगर सदस्य को इस बात से एतराज है कि पानी बल्ह क्यों पहुंचाया जा रहा तो वह विरोध कर सकते हैं।
धवाला व अनिल शर्मा ने विधानसभा क्षेत्र या मंडल वार योजनाओं की डीपीआर और खर्च की गई राशि का ब्योरा मांगा। शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी चर्चा रहती है कि धर्मपुर में मंडी सदन से कई गुना ज्यादा पैसा खर्च हो रहा है। ऐसे में आंकड़े सामने हो तो स्थिति स्पष्ट रहती है।
इन्सेंटिव मनी देगी केंद्र सरकार
मंत्री ने बताया कि 13 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ने बैठक ली और हिमाचल समेत सभी राज्यों से अपना बकाया राशि का ब्योरा देने को कहा है। केंद्र से 663 करोड़ प्रदेश को मिलने हैं। वह जैसे ही मिलेंगे, उनका उपयोग आगे के कार्यों पर किया जाएगा। केंद्र चार हिस्सों में पैसा देता और हिमाचल अकेला राज्य है जिसने सभी हिस्सों में मिलने वाली पूरी राश खिर्च की है। केंद्र सरकार प्रदेश को इन्सेंटिव मनी भी देगी।
275 ने किया आवेदन, 61 की प्रतिनियुक्ति हुई मंजूर
बिजली बोर्ड में बीते तीन वर्षों के दौरान 31 जनवरी 2021 तक 275 कर्मचारियों ने प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया। इनमें 61 कर्मचारियों को ही प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया। तीन मामले विचाराधीन भी हैं। कांग्रेस विधायक इंद्रदत्त लखनपाल के सवाल के लिखित जवाब में ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी ने बताया कि बिजली बोर्ड कर्मचारियों को अन्य राज्यों और देशों में प्रतिनियुक्ति पर भेजता है। प्रतिनियुक्ति की अवधि तीन वर्ष तक रहती है। इसे अधिकतम पांच वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। कुछ महत्वपूर्ण योजनाओं में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों/अधिकारियों की अवधि पांच वर्ष से ऊपर बढ़ाई गई है।
5600 शिक्षकों ने दी कोरोना महामारी से निपटने के कार्यों में सेवा
हिमाचल प्रदेश के 5600 शिक्षकों ने अप्रैल 2020 के बाद कोरोना महामारी से संबंधित कार्यों में सेवाएं दी हैं। भाजपा विधायक रमेश धवाला के सवाल के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री गोविंद ठाकुर ने बताया कि प्रारंभिक शिक्षा विभाग में कार्यरत 2216 प्राथमिक, 773 शास्त्रीय एवं मातृभाषा/स्थानीय भाषा शिक्षकों और 1502 प्रशिक्षित स्नातक शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया था। उच्चतर शिक्षा विभाग ने किसी भी शिक्षक या कर्मचारी को कोरोना की ड्यूटी में नहीं लगाया।
कुछ जिलों में संबंधित जिला के अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी अथवा संबंधित क्षेत्र के उपमंडल अधिकारी से जारी निर्देशों की अनुपालना में जिला उप शिक्षा निदेशक ने विभिन्न स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों और गैर शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया था। कॉलेजों में कार्यरत 60 सहायक आचार्यों/सह आचार्यों, वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत 33 प्रधानाचार्यों, उच्च विद्यालयों में कार्यरत 12 मुख्याध्यापकों, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत 912 प्रवक्ता, 97 शारीरिक शिक्षकों, आउटसोर्स पर नियुक्त 22 आईटी शिक्षक और 11 वोकेशनल शिक्षकों को प्रतिनियुक्त किया गया था।