हिमाचल प्रदेश एक बार फिर वित्तीय अनुशासन और आर्थिक स्वावलंबन के क्षेत्र में देश के लिए मिसाल बना है। भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश की 90 प्रतिशत वयस्क आबादी के पास बैंक खाते हैं, जबकि केवल 7.4 प्रतिशत लोगों ने ही बैंक ऋण लिया है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत 14.7 प्रतिशत की तुलना में काफी कम है और बेहतर वित्तीय स्थिति का संकेत देता है। रिपोर्ट बताती है कि हिमाचल प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से अधिक है। इसके चलते लोगों में कर्ज लेने की प्रवृत्ति कम दिखाई देती है। अधिकांश परिवार जरूरतों को अपनी आय और बचत से पूरा करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह हिमाचल की आर्थिक और सामाजिक स्थिरता का संकेत है। प्रदेश में सरकारी नौकरियों का मजबूत आधार और बेहतर आर्थिक स्थिति लोगों को ऋण के बजाय आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करती है।