हिमाचल में बीते चार दिन से ब्लैकआउट की दिक्कत झेल रहे लोगों पर राज्य बिजली बोर्ड की बदइंतजामी भारी पड़ रही है। तकनीकी स्टाफ की कमी को दूर करने में नाकाम साबित हुए बोर्ड प्रबंधन की बिजली सप्लाई सुचारु करने की तैयारियां फाइलों तक सिमट कर रह गई हैं। बोर्ड प्रबंधन के ब्लैकआउट से निपटने को हाथ खड़े हो गए हैं।
साल 1991 में सृजित पदों के आधार पर ही बिजली बोर्ड प्रबंधन काम चला रहा है। कर्मचारियों की संख्या आधी रह गई है, जबकि सूबे में बिजली कनेक्शन तीन गुना तक बढ़ गए हैं। वर्तमान में सृजित 43 हजार तकनीकी कर्मियों के पदों की जगह सिर्फ 20 हजार कर्मी ही काम कर रहे हैं।
राज्य बिजली बोर्ड इंप्लाइज यूनियन ने सरकार से मांग की है कि बिजली बोर्ड में तकनीकी और कॉमर्शियल कर्मचारियों के पदों को सृजित किया जाए। भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए। यूनियन के अध्यक्ष कुलदीप खरवाड़ा और महासचिव हीरालाल वर्मा ने
बताया कि बिजली बोर्ड में पदों का सृजन वर्ष 1991 में किया गया था। उस दौरान बिजली बोर्ड में कर्मचारियों की संख्या लगभग 43 हजार थी। वर्ष 1991 के मुकाबले आज बोर्ड में उपभोक्ताओं की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है।