संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान।
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मुख्यमंत्री बागवानों को कोरे आश्वासन न दें, जो मांगें मानी हैं, उनकी अधिसूचना जारी कर तुरंत राहत दें। संयुक्त किसान मंच ने 5 अगस्त के आंदोलन के लिए सरकार को चेताया है। मंच के संयोजक हरीश चौहान और सह संयोजक संजय चौहान ने कहा कि प्रदेश में बागवानी संकट के दौर में है। सरकार लापरवाही बरत रही है। सरकार की ओर से माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि संयुक्त किसान मंच की मांगें मान ली गई हैं।
20 मांगों में से महज 5 मांगों पर आश्वासन दिया गया है। अधिसूचना एक भी जारी नहीं की गई। 5 अगस्त को महारैली में 8,000 से 10,000 बागवान शिमला पहुंचेंगे और सचिवालय का घेराव कर अपनी मांगें जोर-शोर से उठाएंगे। सरकार की लापरवाही से आने वाले दिनों में मार्केट क्रैश होने से बागवानों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए कश्मीर की तर्ज पर एमआईएस के तहत ए, बी और सी ग्रेड का सेब 24, 44 और 60 रुपये खरीदने की मांग उठाई जा रही है। प्रदेश में और केंद्र में भाजपा की सरकार है, जब एक देश एक कानून की बात की जा रही है तो कश्मीर की तर्ज पर हिमाचल के बागवानों को राहत क्यों नहीं दी जा रही।
जीएसटी में राहत के दावे सरकार कर रही है, लेकिन 6 फीसदी जीएसटी के बढ़ने से ट्रे का बंडल 250 रुपये मंहगा कैसे हो सकता है। कार्टन प्रति पेटी 20 से 22 रुपये कैसे महंगा हो सकता है। सरकार को इसका भी जवाब देना होगा। एपीएमसी की अवैध वसूली रोकने के लिए सरकार गंभीर नहीं है। मंडियों में अनलोडिंग के नाम पर 25 से 30 रुपये अवैध कटौती हो रही है। बैरियर पर सरकार अवैध टैक्स वसूल रही है। कीटनाशकों और फफूंदनाशकों पर दो साल बाद अनुदान बहाल करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सरकार ने सिर्फ घोषणा की है अधिसूचना जारी नहीं की गई।