हर नागरिक को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2014 में शुरू की गई प्रधानमंत्री जनधन योजना के करीब 12 साल बाद हिमाचल में इसके खातों की जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। प्रदेश में खुले 18,84,707 जनधन खातों में 1,90,912 ऐसे हैं, जिनमें एक भी रुपया नहीं है। यानी हर दस में से करीब एक जनधन खाता शून्य बैलेंस पर है।
सबसे बड़ा सवाल खातों की संख्या नहीं, बल्कि उनका इस्तेमाल है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के आंकड़ों में सामने आया है कि निजी बैंकों में 30.87 फीसदी और स्मॉल फाइनेंस बैंकों में 53.94 फीसदी जनधन खाते खाली हैं। कुछ बैंकों में तो यह अनुपात 70 फीसदी से भी ऊपर पहुंच गया है। दूसरी ओर, सरकारी क्षेत्र और ग्रामीण बैंक में शून्य बैलेंस खातों का प्रतिशत तुलनात्मक रूप से कम है, लेकिन बड़ी ग्राहक संख्या के कारण ऐसे खातों की वास्तविक संख्या हजारों में है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति ने संबंधित बैंकों से इन खातों की समीक्षा कर शून्य बैलेंस रहने का कारण स्पष्ट करने को कहा है। बैंकों को खाताधारकों को नियमित लेनदेन, डिजिटल बैंकिंग और सरकारी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) जैसी सुविधाओं से जोड़ने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैंकवार आंकड़ों में सबसे चौंकाने वाली तस्वीर निजी और छोटे वित्त बैंकों की है। बंधन बैंक में कुल 337 जनधन खातों में 252 यानी 74.78 फीसदी खाते शून्य बैलेंस पर हैं। साउथ इंडियन बैंक में 127 में से 83 खाते यानी 65.35 फीसदी खाली हैं। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 1,331 में से 718 खाते यानी 53.94 फीसदी में कोई राशि नहीं है। कोटक महिंद्रा बैंक में 1,362 में से 595 यानी 43.69 फीसदी खाते शून्य बैलेंस पर हैं।
सरकारी बैंकों में संख्या का दबाव
कुल संख्या देखें तो तस्वीर अलग है। हिमाचल प्रदेश ग्रामीण बैंक में 6,30,123 जनधन खातों में 32,328 खाते शून्य बैलेंस वाले हैं। प्रतिशत सिर्फ 5.13 फीसदी है, लेकिन संख्या सबसे ज्यादा है। यूको बैंक में 30,292 खाते (11.39 फीसदी), पंजाब नेशनल बैंक में 23,757 (11.03 फीसदी) और भारतीय स्टेट बैंक में 21,849 (6.55 फीसदी) खाते खाली हैं। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में 39,975 खातों में 12,967 यानी 32.44 फीसदी खाते शून्य बैलेंस पर हैं।
जनधन खातों की कुल आधार सीडिंग 82.87 फीसदी है, लेकिन बैंकवार स्थिति में बड़ा अंतर है। एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में आधार सीडिंग सिर्फ 0.68 फीसदी है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में यह 48.14 और पंजाब एंड सिंध बैंक में 52.41 फीसदी है।
रुपे कार्ड मिले, इस्तेमाल नहीं
जनधन खातों को डिजिटल बैंकिंग से जोड़ने के दावे के बीच रुपे कार्ड के इस्तेमाल का आंकड़ा भी महत्वपूर्ण है। प्रदेश में कुल 12,27,841 रुपे कार्ड जारी किए गए, लेकिन इनमें से सिर्फ 7,18,058 कार्ड सक्रिय हुए हैं। यानी 5,09,783 कार्ड एक्टिव नहीं हैं। जारी किए गए कार्डों में करीब 41.5 फीसदी कार्ड सक्रिय नहीं हुए।