हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से उपमहाधिवक्ता के एक पद को भरने के लिए होने वाले साक्षात्कार पर रोक लगाने की गुहार को लेकर दायर याचिका को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया। प्रार्थी अधिवक्ता वीर बहादुर वर्मा ने अपनी याचिका में उपमहाधिवक्ता के एक पद को भरने के लिए हो रही चयन प्रक्रिया पर सवालिया निशान उठाया था।
प्रार्थी ने दलील दी थी कि उपमहाधिवक्ता के एक पद के लिए 26 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है और नियमों के अनुसार यदि एक पद के लिए 13 से अधिक अभ्यर्थी आवेदन करते हैं तो छंटनी परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिए। प्रदेश लोक सेवा आयोग ने उपमहाधिवक्ता के एक पद को भरने के लिए सिर्फ साक्षात्कार ही ले रहा है।
प्रार्थी ने अपनी याचिका में कहा था कि उपमहाधिवक्ता के एक पद को भरने के लिए यदि 13 से अधिक आवेदन आते हैं तो चयन प्रक्रिया के बारे में भर्ती एवं पदोन्नति नियम स्पष्ट नहीं हैं। प्रार्थी के अनुसार यदि ऐसा होता है तो चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए छंटनी परीक्षा का आयोजन किया जाना जरूरी है।
मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की खंडपीठ ने प्रार्थी की दलीलों को नकारते हुए प्रार्थी की याचिका को प्रारंभिक सुनवाई में ही खारिज कर दिया।