प्रदेश में मत्स्य विभाग के अधीन अब कुल आठ सेंटर हो गए हैं। जहां से साल में 20 टन ट्राउट का उत्पादन किया जा रहा है। अधिक मांग के चलते विभाग ट्राउट उत्पादन बढ़ाने के लिए योजना बना रहा है ताकि मैट्रो शहरों सहित बड़े-बड़े होटलों से आने वाली मांग को पूरा किया जा सके। विभाग का कहना है कि ट्राउट उत्पादन को बढ़ाने के लिए और हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
चंबा जिला स्थित भांदल ट्राउट सेंटर पहले प्राइवेट था, जिसके चलते विभाग सात ट्राउट सेंटर ही चलाता था। अब भांदल के विभाग के अधीन आ जाने से कुल आठ ट्राउट सेंटर विभाग के पास हो गए हैं। विभागीय अधिकारियों की माने तो हिमाचल में पैदा होने वाली ट्राउट की ज्यादा मांग बाहरी मैट्रो शहरों सहित अन्य बड़े-बड़े होटलों में है। अधिकारियों की माने तो जितना उत्पादन हिमाचल में हो रहा है, उससे ज्यादा मांग पहुंच रही है। इसके अलाव प्रदेश में अन्य प्राइवेट ट्राउट सेंटर की भी छोटी से बड़ी 762 इकाइयां हैं जिनमें 450 टन ट्राउट उत्पादन किया जाता है।
वहीं ट्राउट पालकों की ओर से मछली उत्पादन भी दो तरह का किया जा रहा है। अधिकारी बताते हैं कि लोकल बाजार में ट्राउट मछली 250 ग्राम वजन की बेची जाती है जो एक साल में तैयार होती है, जबकि बड़े शहरों व होटलों में 350 ग्राम की मछली की मांग आती है।
इसे तैयार होने में डेढ़ से दो साल का समय लगता है जो 500 रुपये तक की बिकती है। मत्स्य विभाग के निदेशक सतपाल मेहता का कहना है कि चंबा के भांदल स्थित ट्राउट सेंटर मत्स्य विभाग के पास आ गया है जिससे अब विभाग के पास आठ ट्राउट सेंटर हो गए हैं। विभाग मछली उत्पादन बढ़ावे को लेकर लगातार प्रयासरत है।