शिमला शहर में कांग्रेस कई गुटों में बंटी है। कांग्रेस प्रत्याशी के समक्ष यहां से कांग्रेस के ही नेता बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ते रहे हैं। कांग्रेस की इस गुटबाजी से भाजपा की राह शहर में आसान रहती है। ऐसे में राठौर समर्थकों ने वर्ष 2022 के चुनावों के लिए ठियोग के साथ शिमला शहर से चुनाव लड़ने के के लिए सेफ सीट को लेकर मंथन शुरू कर दिया है।
वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए सियासी जमीन तलाशने में जुटे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर की ठियोग के साथ शिमला शहर पर भी नजर है। राठौर का कहना है कि जिस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत जब्त हुई, वहां से मैं विधानसभा चुनाव लड़ूंगा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में ठियोग से कांग्रेस प्रत्याशी दीपक राठौर और शिमला शहर से प्रत्याशी हरभजन सिंह भज्जी की जमानत जब्त हो चुकी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से ठियोग के बाद अब शिमला शहर से चुनाव लड़ने का संकेत देने से कांग्रेस की राजनीति गरमा गई है।
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ठियोग विधानसभा क्षेत्र से बीते चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे दीपक राठौर की कांग्रेस हाईकमान तक पहुंच है। दीपक ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए शिमला शहर से आवेदन किया था। शिमला से टिकट नहीं मिलने पर दीपक राठौर को ठियोग से चुनाव मैदान में उतारा गया। विद्या स्टोक्स जैसी कद्दावर नेता का टिकट काटकर हाईकमान ने दीपक को तवज्जो दी थी। दीपक बीते चार वर्षों से चुनाव क्षेत्र में सक्रिय भी हैं। माकपा विधायक राकेश सिंघा भी चुनौती के तौर पर ठियोग के रणक्षेत्र में खड़े हुए हैं।
शिमला शहर में कांग्रेस कई गुटों में बंटी है। कांग्रेस प्रत्याशी के समक्ष यहां से कांग्रेस के ही नेता बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ते रहे हैं। कांग्रेस की इस गुटबाजी से भाजपा की राह शहर में आसान रहती है। ऐसे में राठौर समर्थकों ने वर्ष 2022 के चुनावों के लिए ठियोग के साथ शिमला शहर से चुनाव लड़ने के के लिए सेफ सीट को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। राठौर की ठियोग से टिकट के लिए कवायद अगर सिरे नहीं चढ़ती है तो शिमला शहर का विकल्प भी साथ में रखा जा रहा है। अभी शिमला शहर में कांग्रेस प्रत्याशी बनने योग्य एक चेहरा तय नहीं है।
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हर गुट की ओर से अपने लोगों के लिए लॉबिंग की जा रही है। पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू का गुट शहर में सक्रिय है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा की पसंद भी नजरअंदाज नहीं की जा सकेगी। ऐसे में आने वाले दिनों में ठियोग और शिमला शहर में कांग्रेस की राजनीति खूब गरमाने वाली है। राठौर की अगुवाई में कांग्रेस ने प्रदेश में चार उपचुनावों में भाजपा को पटकनी दी है। हाईकमान के पास राठौर का सियासी कद भी बढ़ा है। बीते कई वर्षों से राठौर संगठन में कार्य कर रहे हैं। इसका लाभ इन्हें वर्ष 2022 के प्रत्याशियों के चयन के समय मिलने के आसार हैं।