जाहिर है, सरकार में बैठे सियासी पंडितों को भी पता है कि विकास से ज्यादा जनता पर व्यक्तिगत लाभ का असर ज्यादा होता है और उसी के बूते चुनावी समर में फायदा मिलना है। इसी वजह से जयराम के दूसरे बजट में वेतन और पेंशन पर खर्च का हिस्सा बढ़ा दिया गया है।
वहीं, जानकारों का कहना है कि लोन और ब्याज पर खर्चा घटना प्रदेश की आर्थिकी के लिए अच्छा संकेत है लेकिन कर्मचारी व पेंशनर्स का खर्च बढ़ना और सरकार का भी उसी पर फोकस करना ठीक नहीं है।
हालांकि जानकार यह उम्मीद भी जता रहे हैं कि चूंकि इस साल मई जून तक लोकसभा के चुनाव होने हैं, ऐसे में सरकार ने भले ही उधार चुकाने का खर्च घटाकर लोगों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाकर भले ही इस साल अपने पक्ष में करने का प्रयास करे लेकिन अगले साल के बजट में भी अगर सब ठीक रहा तो विकास के लिए खर्च बढ़ने की उम्मीद की जा सकती है।
हर सौ रुपये में कुछ इस तरह सरकार ने बांटा खर्च का अनुपात
2018-19 मद 2019-20
27.18 वेतन पर खर्च 27.84
14.22 पेंशन पर खर्च 15.00
10.28 ब्याज अदायगी 10.25
8.6 ऋण अदायगी 7.35
39.56 विकास कार्य पर 39.56