हिमाचली सेब की गाला वैरायटी के आगे न्यूजीलैंड से आयात किया जा रहा गाला सेब फीका पड़ गया है। पंजाब की फल मंडियों में हिमाचली गाला सेब 200 से 240 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। न्यूजीलैंड से आयात किए जा रहे गाला सेब को 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक ही दाम मिल रहे हैं। स्वाद, रंग और आकार में न्यूजीलैंड के सेब के मुकाबले हिमाचली गाला सेब अव्वल साबित हो रहा है।
पंजाब में विदेशी सेब की भारी खपत होती है। इस साल न्यूजीलैंड से आयात हो रहे गाला सेब के मुकाबले कारोबारी हिमाचली गाला सेब को प्राथमिकता दे रहे हैं। मार्केट में हिमाचली गाला सेब लोगों को न्यूजीलैंड के सेब के मुकाबले ज्यादा पसंद आ रहा है। मार्केट में स्थिति ऐसी है कि सेब की स्पर किस्म के मुकाबले गाला किस्म को अधिक तवज्जो मिल रही है।
आलम यह है कि मार्केट में न्यूजीलैंड के सेब की खपत घट गई है और हिमाचली गाला सेब की डिमांड बढ़ती जा रही है। सेब कारोबारी हिमाचली गाला सेब को हाथोंहाथ खरीद रहे हैं। कोटखाई बखोल के प्रगतिशील बागवान संजीव चौहान का कहना है कि हिमाचली सेब की गाला वैरायटी ने सेब की स्पर किस्मों को भी पछाड़ दिया है। ऐसे क्षेत्रों में जहां सेब की अन्य किस्में कामयाब नहीं हो पा रही, बागवानों के लिए गाला सेब बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
चिलिंग ऑवर कम, निचले क्षेत्रों में भी कामयाब
गाला वैरायटी की खासियत है कि इसे महज 800 घंटे चिलिंग ऑवर की जरूरत रहती है, जबकि सेब की डिलिशियस किस्म को 1600 घंटे चिलिंग ऑवर चाहिए। इतना ही नहीं, गाला वैरायटी पथरीली जमीन और तेज धूप वाली जगहों पर भी कामयाब है। इसलिए हिमाचल के निचले क्षेत्रों में भी सेब की गाला वैरायटी का उत्पादन संभव है।
हिमाचली गाला सेब की सबसे ज्यादा मांग : दीपक
चुग फ्रूट कंपनी लुधियाना के कारोबारी दीपक अरोड़ा ने बताया कि हिमाचली गाला सेब की मांग मार्केट में सबसे अधिक है। न्यूजीलैंड के सेब को भी हिमाचली गाला ने पछाड़ दिया है। न्यूजीलैंड का सेब 40 दिन ट्रैवल टाइम के बाद पहुंचता है। उसके बाद कोल्ड स्टोर में रहता है। हिमाचल गाला से पेड़ से तोड़ने के तीसरे दिन मार्केट में पहुंच रहा है। इसका रंग और स्वाद बेहतरीन है।