हिमाचल में किसान अब खेतों से ही अपनी उपज बेच सकेंगे। जयराम सरकार मंडियों में उत्पाद ले जाने की अनिवार्यता खत्म करने जा रही है। सरकार इसके लिए कानून बनाने जा रही है। धर्मशाला में प्रस्तावित विधानसभा के शीत सत्र में इस बारे में विधेयक लाया जा सकता है। बिल का ड्राफ्ट लगभग तैयार है।
इसके ड्राफ्ट में मार्केटिंग बोर्ड से मंडियों के रेगुलेशन की शक्तियां लेने का प्रावधान भी किया गया है। प्रदेश में 57 मंडियां हैं। इनमें किसी भी तरह की अनियमितता की कार्रवाई राज्य कृषि विपणन निदेशालय के पास रहेगी।
वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुना करने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को कार्यरूप देने के लिए ही यह बिल पारित किया जा रहा है। इस विधेयक का नाम हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइव स्टॉक मार्केटिंग-प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन बिल -2018 रखा गया है।
इस बिल के ड्राफ्ट को जल्द अंतिम रूप देने को कहा गया है और इसे राज्य मंत्रिमंडल में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद इस पर विधि विभाग में वैटिंग हो रही है।
कानून बनने के बाद ये होंगे प्रावधान
- किसान अपनी मर्जी से कहीं भी फसल बेच सकेगा
- पंजीकृत प्रोसेसर, बल्क बायर, मैन्यूफैक्चर्स किसानों से सीधे खेतों में संपर्क कर सकेंगे
- मार्केटिंग बोर्ड, एपीएमसी के पास केवल मार्केटिंग और मंडियों को विकसित करने का काम रहेगा
- उपज के क्वालिटी सर्टिफिकेशन के बाद ऑनलाइन ट्रेडिंग हो सकेगी
- फलों, सब्जियों के अलावा फूल, औषधीय पौधों का भी इस तरह विक्रय होगा
- किसान, उत्पादक संघों, सहकारी सभाओं को प्रोत्साहन देंगे