प्लास्टिक उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को मिलाकर करीब 84 इकाइयों ने ही ईपीआर पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है, जबकि प्रदेश में 800 प्लास्टिक अपशिष्ट पैकेजिंग इकाइयां क्रियाशील हैं।
हिमाचल में प्लास्टिक उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को मिलाकर करीब 84 इकाइयों ने ही ईपीआर पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है, जबकि प्रदेश में 800 प्लास्टिक अपशिष्ट पैकेजिंग इकाइयां क्रियाशील हैं। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष इकाइयों को भी निर्धारित मानकों के अनुसार ईपीआर पोर्टल पर पंजीकृत करना आवश्यक होगा। सचिवालय में गुरुवार को आयोजित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष संजय गुप्ता ने यह निर्देश दिए हैं।
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बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से अधिसूचित प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (संशोधन) नियम, 2022 के प्रावधानों पर व्यापक चर्चा की गई। गुप्ता ने कहा कि इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य प्लास्टिक पैकेजिंग अपशिष्ट का समुचित प्रबंधन करना है, जो हाल ही के वर्षों से पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है। पंजीकरण के दौरान प्लास्टिक उत्पादों की मात्रा, आयात व बेचे गए उत्पादों के ब्योरा सहित इसके प्रबंधन के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देनी आवश्यक होगी। प्लास्टिक अपशिष्ट संसाधकों को प्रत्येक वित्त वर्ष में 30 अप्रैल तक श्रेणीवार इस बारे में अपना वार्षिक विवरण प्रस्तुत करना होगा।
उत्पादकों, आयातकों और ब्रांड मालिकों को प्लास्टिक पैकेजिंग अपशिष्ट एकत्रीकरण और इसके संसाधन के बारे में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व प्रदूषण नियंत्रण समिति के समक्ष प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 30 जून तक निर्धारित प्रपत्र पर वार्षिक विवरण देना होगा। अपशिष्ट राज्य से बाहर संसाधकों को भेजे जाते हैं तो एकत्रीकरण ढांचे और परिवहन का ब्योरा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को देना होगा।