रिपोर्ट के अनुसार 03 मार्च 2025 को जारी आपूर्ति आदेश की मूल वितरण अवधि 60 दिन थी, जो 02 मई 2025 तक मान्य रही। आपूर्ति आदेश के खंड संख्या-9 में स्पष्ट प्रावधान है कि निर्धारित वितरण अवधि के भीतर केवल कीमतों में वृद्धि को ही स्वीकार किया जाएगा, जबकि कमी की स्थिति में संशोधित दरें लागू होनी थीं। इसके बावजूद फर्मों ने ऊंची दरों का लाभ उठाने के लिए अधिकांश सामग्री की आपूर्ति डिलीवरी अवधि के बाद दिखाई। रिकॉर्ड के अनुसार मार्च से जून 2025 के बीच कच्चे माल की कीमतें घटी थीं।
ऐसे में नियमों के तहत टेंडर में दी गई कीमत में कटौती की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि वितरण अवधि और कीमत संशोधन के नियमों की अनदेखी कर सरकारी धन को नुकसान पहुंचाया गया। अब इस पूरे मामले की गहन जांच की मांग उठ रही है। इससे पहले बड़सर और आनी के लिए भेजे गए जीआई पाइप की एक ट्रक से दूसरे ट्रक में ट्रांसशिपमेंट के दौरान नियमों की अनदेखी कर वीडियोग्राफी न करने का का भी खुलासा हो चुका है। इसके बाद विभाग ने नियमों की अवहेलना पर फर्म की 22 करोड़ की पेमेंट रोक दी है और सिविल सप्लाई कॉरपोरशन से जांच रिपोर्ट भी तलब की है।
विभागीय निविदाओं एवं क्रय आदेशों की शर्तों के अनुसार प्राइस वेरिएशन क्लॉज के तहत यह प्रावधान है कि डिलीवरी अवधि के बाद प्राप्त सामग्री का भुगतान केवल न्यूनतम दरों पर ही किया जाता है। विभाग की ओर सभी भुगतान निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुरूप ही किए गए हैं। - अंजू शर्मा, प्रमुख अभियंता, जल शक्ति विभाग, हिमाचल प्रदेश।