वहीं, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पेंशनरों के चिकित्सा बिलों का भुगतान भी पिछले एक साल से लंबित है। इससे समस्या और बढ़ गई है। ज्यादातर वक्ताओं ने प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। निर्णय लिया गया कि 20 सितंबर को प्रदेशभर में जिला मुख्यालयों पर पेंशनर धरना-प्रदर्शन करेंगे। पेंशनरों ने मांग की कि सरकार लंबित मांगों पर ध्यान दे और संयुक्त सलाहकार समिति का गठन कर सभी मुद्दों को सुलझाए। पेंशनरों ने कहा कि इससे पहले भी कई सरकारों ने वार्ता कर पेंशनरों की समस्याओं को सुलझाया है। बैठक में मोहन ठाकुर, पीएन भारद्वाज, मदन, हरिचंद गुप्ता, जीवन, भूपराम, कुशाल गुप्ता, सुभाष वर्मा और गुलाब सिंह मौजूद रहे।
व्यावसायिक शिक्षकों ने हरियाणा की तर्ज पर मांगी नीति
व्यावसायिक शिक्षक संघ ने हरियाणा की तर्ज पर नीति बनाने की मांग की है। संघ के प्रधान अश्वनी डटवालिया और राज्य महासचिव नीरज बंसल ने कहा कि व्यावसायिक शिक्षक काफी लंबे समय से प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। लाखों बच्चों को हर वर्ष कुशल कर रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। नई शिक्षा नीति में भी व्यावसायिक शिक्षा को तरजीह दी गई है। बावजूद व्यावसायिक शिक्षक कंपनियों के अधीन काम करने को मजबूर हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी पूर्व सरकार के समय से हरियाणा की नीति का अध्ययन कर रहे हैं लेकिन अभी तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया है।